
भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) ने अब हरित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को बीएसपी के मरोदा-1 जलाशय में राज्य का पहला 15 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट चालू किया गया। इसका उद्घाटन बीएसपी के प्रभारी निदेशक चित्त रंजन महापात्रा और निदेशक (वित्त) डॉ. अशोक कुमार पांडा ने किया। इसे स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) और एनटीपीसी के संयुक्त उद्यम एनएसपीसीएल द्वारा विकसित किया गया है। यह भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का एक नया मॉडल बनेगा। लगभग ₹111.35 करोड़ की लागत से निर्मित यह प्लांट 80 एकड़ जल क्षेत्र में विकसित किया गया है। इससे सालाना 34.25 मिलियन यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा। इस ऊर्जा का भिलाई इस्पात संयंत्र में ही पूरा उपयोग किया जाएगा, जिससे सालाना 28,400 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी और लगभग 0.23 लाख टन कोयले की बचत होगी।
इस परियोजना से जलाशय में वाष्पीकरण भी कम होगा और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रभारी निदेशक महापात्रा ने कहा, “यह परियोजना बीएसपी को हरित ऊर्जा प्रदान करने में एक मील का पत्थर है। मरोदा-1 की सफलता के बाद, मरोदा-2 जलाशय में भी इसी तरह की पहल लागू की जाएगी।” डॉ. पांडा ने कहा कि इस्पात उद्योग पर्यावरण पर दबाव डालता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। “सौर ऊर्जा असीमित और हरित है। इसे अपनाना भारत और सेल की कार्बन-मुक्ति यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” एनएसपीसीएल के सीईओ दिवाकर कौशिक ने भी इस पहल को सेल और एनटीपीसी के बीच मजबूत सहयोग का प्रतीक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट राज्य के लिए एक आदर्श साबित होगा, जिससे भविष्य में अन्य जिलों में भी इसी तरह की परियोजनाओं के लिए रास्ता खुलेगा।
इस परियोजना की परिकल्पना राजीव पांडे, मुख्य महाप्रबंधक (विद्युत सुविधाएँ) एवं निदेशक (एनएसपीसीएल) ने की थी। इसे बीएसपी के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक (वित्त एवं लेखा) डॉ. अशोक कुमार पांडा ने अनुमोदित किया था। 9 मई, 2024 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और 30 जून, 2024 को आधारशिला रखने के बाद, इसे मेसर्स माधव इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और क्वांट सोलर द्वारा क्रियान्वित किया गया। इस अवसर पर एनएसपीसीएल, भिलाई इस्पात संयंत्र, सीआईएसएफ और परियोजना सहयोगी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
क्षमता 15 मेगावाट, 80 एकड़ जल क्षेत्र में निर्मित।
लागत – ₹111.35 करोड़।
ऊर्जा उत्पादन – 34.25 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष…
पर्यावरणीय लाभ – 28,400 टन CO2 उत्सर्जन में कमी, 0.23 लाख टन कोयले की बचत।
महत्व – राज्य का पहला तैरता हुआ सौर ऊर्जा संयंत्र, रोजगार सृजन भी
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