विज्ञान

रियाल में होगा जीवंत का अनुभव

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसिक की है, जिससे किसी उद्घाटन समारोह या फैशन शो को लाइव देखते हुए आप ऐसा महसूस करेंगे, मानो सामने बैठकर देख रहे हैं।

SCIENCE/विज्ञानं : नोरंजन, फैशन और मेकअप इंडस्ट्री में ऑग्युमेंटेड रियलिटी (एआर) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसके लिए अलग-अलग तकनीकें उपलब्ध हैं, लेकिन डायनामिक फेशियल प्रोजेक्शन मैपिंग (डीएफपीएम) सिस्टम सबसे परिष्कृत और देखने में आश्चर्य से भर देने वाली तकनीक है। डीएफपीएम में किसी व्यक्ति के चेहरे पर उसी समय डायनामिक विजुअल्स को प्रोजेक्ट किया जाता है। इसमें एडवांस्ड फेशियल ट्रैकिंग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह सुनिश्चित करती है कि चेहरे की भाव-भंगिमा और शरीर की हलचल पर प्रोजेक्शन सहज और सटीक रूप से जुड़े, ताकि दर्शकों को जीवंत अनुभव मिल सके। तकनीकी चुनौतियों के चलते ऐसा नहीं हो पा रहा था, मगर अब इसका समाधान मिल गया है।

■ क्या थी चुनौती

ऑग्युमेंटेड रियलिटी में डीएफपीएम के बाद जो तकनीक उभरकर आती थी, उससे देखने का अनुभव इतना जीवंत होना चाहिए था कि दृश्यों और वास्तविकता में कोई अंतर ही न रहे। इसके लिए जरूरी था कि डीएफपीएम सिस्टम एक मिलीसेकंड से भी कम समय में चलते हुए चेहरे पर विजुअल्स को प्रोजेक्ट कर सके। प्रोजेक्टर और कैमरे के इमेज कोऑर्डिनेट के बीच मामूली मिसअलाइनमेंट या प्रोसेसिंग में क्षणिक देरी होने पर प्रोजेक्शन में अंतर आ जाता था, जिससे दर्शकों को जीवंत अनुभव नहीं मिल पाता था।

■ कैसे मिला समाधान

जापान के टोक्यो विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने डीएफपीएम सिस्टम की इन चुनौतियों को लेकर समाधान प्रस्तुत किया है। यह ‘इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स’ की विज्ञान पत्रिका ‘ट्रांजेक्शन ऑन विजुअलाइजेशन एंड कंप्यूटर ग्राफिक्स’ में प्रकाशित हुआ है। शोध में शामिल संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर योशीहिरो वतनबे के अनुसार, अलग-अलग तकनीकों को एक साथ जोड़कर एक अत्याधुनिक उच्च गति वाला पीएफपीएम सिस्टम तैयार किया गया है। इसके लिए सबसे पहले ‘हाई-स्पीड फेस ट्रैकिंग मेथड’ नामक एक हाइब्रिड तकनीक विकसित की गई, जो प्रोग्राम के समय ही चेहरे के अंगों (नाक, आंख, मुंह आदि) का पता

लगाने के लिए दो अलग-अलग तरीकों को समानांतर जोड़ती है। पहला, उच्च परिशुद्धता, लेकिन धीमी पहचान और दूसरा, कम परिशुद्धता, लेकिन तेज पहचान। इसके बाद अंगों के पता लगाने का समय न्यूनतम करने के लिए एनसेंबल ऑफ रिग्रेशन ट्रीज (ईआरटी) विधि का प्रयोग किया गया। पता लगाने के लिए तेजी से आने वाली तस्वीरों को चेहरे पर कुशलतापूर्वक क्रॉप करने के लिए भी तकनीक विकसित की गई। साथ ही ईआरटी में तकनीकी त्रुटि होने पर वैकल्पिक तकनीक का भी विकल्प रखा गया, जिससे कम गति पर भी पूरी सटीकता मिल सके। इस नए सिस्टम से वैज्ञानिकों ने 0.107 मिलीसेकंड में चेहरे की भाव-भंगिमा पर विजुअल्स को प्रोजेक्ट करने में सफलता पाई। दावा है कि यह एआर की दुनिया को बदल सकती है।

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