लाइफ स्टाइल

आपका घर भी बनाता है बच्चों का भविष्य

परवरिश का अहम हिस्सा है घर। घर में सब कुछ परफेक्ट होगा तो बच्चे का भविष्य भी पटरी पर रहेगा। इसलिए घर को आदर्श रूप दें। यह परवरिश का नया अध्याय है।आ कि छोटे बच्चों को कितना अच्छा और सुरक्षित लगता होगा अपनेप कितना सुकून महसूस करती हैं घर पहुंचकर, तो जरा सोचिए घर में।

लाइफस्टाइल : बच्चे घर में ही खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं और घर से ही बहुत कुछ सीखते भी हैं। यहां बात घर के आलीशान बंगले या फ्लैट होने की नहीं, बल्कि उसमें रखे सामान, माहौल से लेकर वहां रहने वाले हर व्यक्ति की है। घर का माहौल बेहतर होता है तो बच्चे का भविष्य भी उज्ज्वल बनता है। लेकिन सवाल यह है कि इसके लिए कौन-कौन सी बातें ध्यान रखें? लगाव, साथ और व्यवहार: बच्चा छोटा है तो उसे समय दें।

उसके साथ खेलें। इससे बच्चा आपसे भावनात्मक रूप से जुड़ेगा। आप उसकी इच्छाओं का सम्मान करें और उपलब्धियों की तुलना दूसरों से न करें। इससे बच्चा बहुत कुछ सीखेगा, अन्यथा जैसे ही वह बड़ा होगा, आपसे बातें छिपाना शुरू कर देगा। आप बच्चे के सामने खुद की जो तस्वीर पेश करती हैं, उससे बच्चा सीखता है और उसे अपने व्यवहार में शामिल करता है। कोशिश करें कि बच्चे के सामने हर सदस्य के बीच आपसी संबंध मधुर रहें तो वह भी इसे अपनाएगा। ये सब घर में ही संभव है।गले लगाने का जादू बच्चे के दिमाग का विकास हो, इसके लिए उसे सिर्फ सिखाएं नहीं, उसे गले भी लगाएं। इससे भावनात्मक विकास के साथ-साथ उसका शारीरिक और मस्तिष्क का विकास भी होगा।

कई बच्चे अपनी भावनाओं को प्रकट करने में असमर्थ होते हैं। नतीजा, झुंझलाहट और क्रोध। ऐसे में बच्चों को गले लगाएं। आप उन्हें बता सकती हैं कि आप हर उस जगह उनके साथ खड़ी हैं, जहां मुसीबत है।सीखना घर से माता-पिता बच्चे को प्रतिभा विकसित करने के लिए जो वातावरण देते हैं, वह उसके बड़े होने के क्रम में महत्वपूर्ण होता है। यदि आपका बच्चा खुश और आरामदायक माहौल में रहता है तो वह शिक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है। बच्चे की रुचि विकसित करना भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

घर का माहौल ही बच्चे को अनेक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति देता है, उसकी सोच को तेज और व्यक्तिगत कौशल विकास को व्यापक बनाता है।स्मार्टफोन नहीं, स्मार्ट विकल्प: सेलफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर के साथ बच्चे का परिचय अब बहुत सामान्य बात है। बच्चे स्पंज की तरह होते हैं। वे जो कुछ भी देखते हैं या सामना करते हैं, उसे ग्रहण कर लेते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि बच्चे इन गैजेट्स पर अनावश्यक रूप से निर्भर न हों। वे ऑफलाइन दुनिया से कट न जाएं। बच्चे का स्क्रीन समय सीमित करें, लेकिन ऐसा भी न हो कि वह तकनीक से अनजान रहे।

YouTube channel Search – www.youtube.com/@mindfresh112 , www.youtube.com/@Mindfreshshort1

नए खबरों के लिए बने रहे सटीकता न्यूज के साथ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
स्वाद भी सेहत भी: बयु/बबुआ खाने के फायदे जानकर आप भी इसे डाइट में ज़रूर शामिल करेंगे गले की खराश से तुरंत राहत: अपनाएं ये असरदार घरेलू नुस्खे सर्दियों में कपड़े सुखाने की टेंशन खत्म: बिना बदबू और फफूंदी के अपनाएं ये स्मार्ट हैक्स सनाय की पत्तियों का चमत्कार: कब्ज से लेकर पेट और त्वचा रोगों तक रामबाण पानी के नीचे बसाया गया अनोखा शहर—मैक्सिको का अंडरवाटर म्यूजियम बना दुनिया की नई हैरानी सुबह खाली पेट मेथी की चाय—छोटी आदत, बड़े स्वास्थ्य फायदे