श्याम सुंदर से मीठी बातें
टावा जिले के पुरैला नामक गांव में जन्मे संत मथुरादास महाराज अयोध्या में रहकर भगवान की भक्ति करते थे। वे एकांत में भगवान से मीठी-मीठी बातें किया करते थे।

इ संत मथुरादास महाराज का जन्म इटावा जिले के पुरैला नामक गांव में हुआ था। बचपन से ही उनमें भगवान के प्रति भक्ति जागृत थी। उनके माता-पिता उनका विवाह करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने अपने माता-पिता को समझाया कि वे सांसारिक बंधनों में नहीं बंधना चाहते। उनकी तार्किक बातें सुनकर परिवार वालों ने विवाह का विचार त्याग दिया, लेकिन उन्हें घर की जिम्मेदारी सौंप दी। मथुरादास जी ने कुछ समय तक तो घर का कुशलतापूर्वक संचालन किया, लेकिन उनका स्वभाव इसमें ज्यादा समय तक नहीं रहा। वे घर छोड़कर अयोध्या चले गए और बड़ी छावनी के तत्कालीन स्वामी ईश्वरदास जी के शिष्य बन गए। वे गरीबों, बुजुर्गों और बीमारों की भक्ति भाव से सेवा करते थे। उनके सेवा कार्य से प्रसन्न होकर एक वृद्ध संत ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि भगवान अंतर्यामी संगृहीरं तुम्हें दर्शन देंगे। महाराज जी ने जीवन भर प्रतिदिन सरयू में स्नान करने तथा संतों की चरण धूलि को मस्तक पर लगाने का व्रत पूरा किया। वे एकांत में मधुर बातें किया करते थे। यह देखकर एक भक्त ने जिज्ञासावश पूछा, महाराज, आप एकांत में किससे बातें करते हैं? महाराज ने इशारा करके कहा, ‘इस श्याम सुंदर को देखिए।’ यह सुनते ही भक्त का शरीर कांप उठा तथा आंखें बिजली की चमक से चौंधिया गईं। महाराज जी का पूरा जीवन गरीबों तथा विद्यार्थियों की सहायता में बीता तथा जानकी नवमी के दिन उन्होंने रामधुन गाते हुए अपना भौतिक शरीर त्याग दिया।
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