प्रेरणा

पुनर्जन्म का सिद्धांत

पुनर्जन्म से जुड़े किस्से-कहानियाँ हमें अक्सर सुनने व पढ़ने को मिलते हैं। कई बार हमारे आस-पास भी ऐसी घटनाएँ घटती हैं, जिन पर हमें विश्वास नहीं होता। हमें भले ही विश्वास हो या न हो, पर यह सत्य है कि शरीर की मृत्यु के पश्चात भी जीवात्मा का अस्तित्व बना रहता है और मृत्यु के उपरांत जीवात्मा पुनः नूतन शरीर प्राप्त कर नया जीवन धारण करती है अर्थात जीवात्मा पुनः जन्म लेती है।नया जीवन या नया शरीर धारण करने के बाद कभी-कभी किसी व्यक्ति को अपने पूर्वजन्म की घटनाएँ याद आने लगती हैं और उन घटनाओं को सुनकर हम आश्चर्य से भर उठते हैं। पुनर्जन्म की एक ऐसी ही रोचक व आश्चर्यजनक घटना उत्तर प्रदेश के एक गाँव की है।दरअसल उस छोटे से गाँव में जन्मे अनिकेत की बातें उसके माता-पिता ही नहीं, बल्कि दूसरों को भी यह मानने को मजबूर करती हैं कि अनिकेत का पुनर्जन्म हुआ था। वर्षों पूर्व उत्तर प्रदेश के उस छोटे-से गाँव में जन्मे अनिकेत को बचपन से ही हनुमान जी के प्रति विशेष अनुराग था।एक बार जब उसके पिताजी बाजार से हनुमान जी का चित्र लेकर आए थे तब उस चित्र को देखकर अनिकेत बहुत प्रसन्न हुआ। तब अनिकेत मात्र छह वर्ष का था। उस चित्र को देखते ही अनिकेत के मुख से हनुमान जी से संबंधित कई मंत्र प्रस्फुटित होने लगे। वह हनुमान जी के चित्र को सामने रखकर बिना चालीसा देखे ही हनुमान चालीसा, बजरंग बाण व हनुमान जी की आरती आदि पाठ करने लगा।

यह देखकर उसके माता-पिता भी आश्चर्यचकित थे। अनिकेत को उन्होंने कभी हनुमान चालीसा पढ़ना नहीं सिखाया, उसे लेकर कभी हनुमान मंदिर भी नहीं गए व न ही उसे हनुमान जी का कभी चित्र दिखाया। फिर भी पहली बार में ही हनुमान जी का चित्र देखकर उन्हें पहचान लेना और उनकी स्तुति करना, यह सब अनिकेत के माता-पिता के लिए किसी अबूझ पहेली से कम न था। समय के साथ धीरे-धीरे अनिकेत को अपने पिछले जन्म की घटनाएँ एक-एक करके याद आने लगीं।अब अनिकेत 10 वर्ष का हो चुका था। अचानक उसने अपने माता-पिता को जो कहानी सुनाई, उसे सुनकर उसके माता-पिता ही नहीं, उसके आस-पास के लोग भी हैरान रह गए। अनिकेत अचानक अपना नाम अमोल बताने लगा और अपना घर फैजाबाद के एक छोटे से गाँव में बताने लगा और साथ ही वह वहाँ जाने की जिद भी करने लगा।उसने बताया- “मेरा घर फैजाबाद के पास एक गाँव में था। मेरे पिता किसान थे और हनुमान जी के परम भक्त थे। वे अक्सर अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर जाया करते थे। वहाँ से हनुमान जी का चित्र लाकर वे घर में हनुमान जी की नित्य उपासना किया करते थे। पिताजी के साथ मैं भी हनुमान चालीसा का पाठ किया करता था। तभी से मुझे हनुमान जी से विशेष प्रेम है।”एक दिन अचानक रामनवमी के दिन हृदयाघात के कारण पिताजी चल बसे। पिताजी की मृत्यु के बाद माताजी भी चल बसीं। हम दो भाई और एक बहन थे।

बड़े भाई की शादी हो गई थी। भाई का व्यवहार तो ठीक था, पर भाभी बड़ी क्रूर थीं। मुझे बहुत परेशान किया करती थीं।”मैं 22 वर्ष का था और तभी मैं भाभी के व्यवहार से तंग आकर अयोध्या के एक आश्रम में रहने लगा। वहाँ रहते हुए मैं रोज हनुमानगढ़ी मंदिर जाकर हनुमान जी का दर्शन किया करता था। 35 वर्ष की अवस्था में मैं पुनः गाँव लौट आया, पर दो वर्षों के बाद ही मेरी मृत्यु हो गई।”यह कहानी सुनकर एवं अनिकेत की जिद को देखते हुए उसके माता-पिता उसे फैजाबाद के उस गाँव में लेकर गए, जिसे वह अपना गाँव बताता था। वहाँ पहुँचते ही वह अपने घर को पहचान गया। वहाँ पता चला कि उसके भैया-भाभी की मृत्यु हो चुकी है और उनके बच्चे वहाँ रह रहे हैं। उसने अपने गाँव के दोस्तों, गाँव के मंदिर, तालाब, स्कूल, स्कूल के शिक्षक सबके बारे में बताया, जिसे सुनकर गाँव के लोग हतप्रभथे। उसकी बातें सुनकर गाँव के लोगों को विश्वास हो गया कि वास्तव में यह पूर्वजन्म का अमोल ही है।उस गाँव के बारे में, उसके घर के बारे में, उसके माता-पिता के बारे में गाँव के लोगों ने उससे कई प्रश्न किए और उसने जो बातें बताईं, वे अक्षरशः सत्य थीं; जिन्हें सुनकर गाँव के लोग आश्चर्यचकित थे।

उस गाँव के बाद वह अयोध्या के उस आश्रम में गया जहाँ वह कुछ वर्षों तक रहा था। वह उस आश्रम के साधु-संतों व संचालक को देखते ही पहचान गया। आश्रम के लोग भी अमोल के बारे में उसके द्वारा बताई गई बातों को अक्षरशः सत्य बता रहे थे।अंत में अनिकेत अयोध्या के हनुमानगढ़ी जाकर हनुमान जी का दर्शन करते ही भावविभोर हो गया। वह खुशी के मारे नाचने लगा। उसने हनुमान जी की पूजा-अर्चना की और फिर अयोध्या के एक संत से हनुमान मंत्र की दीक्षा ली। उसके माता-पिता भी दीक्षित हुए।वे सभी वापस अपने घर आ गए और अब – पूरा परिवार हनुमान जी की विधिवत् नियमित – पूजा-उपासना करने लगा। हनुमान जी की पूजा-उपासना से अनिकेत का मन शांत होने लगा। उसके माता-पिता भी हनुमान जी की उपासना के प्रभाव से आनंदित रहने लगे। उनके घर में सुख-शांति एवं समृद्धि छाने लगी। पुनर्जन्म की यह घटना आश्चर्यजनक, परंतु सत्य है।

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