पं. माधवराव सप्रे की गिरफ़्तारी

छत्तीसगढ़ इतिहास : पं. माधवराव सप्रे लोकमान्य तिलक के राष्ट्रवादी विचारों से प्रभावित थे। उनकी प्रेरणा और प्रोत्साहन से उन्होंने 1907 में नागपुर से हिंदी केसरी का प्रकाशन प्रारंभ किया। मराठी केसरी में प्रकाशित महत्वपूर्ण समाचार प्रायः हिंदी भाषा में भी प्रकाशित होते थे। 1908 में मराठी केसरी में प्रकाशित लेखों के कारण लोकमान्य तिलक पर मुकदमा चलाकर जेल भेज दिया गया। माधवराव सप्रे ने हिंदी केसरी में ‘समाधान टिकाऊ नहीं’ शीर्षक से एक लेख भी प्रकाशित किया था। अतः सप्रे पर राजद्रोह का आरोप भी लगाया गया। बाद में परिवार के सदस्यों के दबाव के कारण उन्होंने ब्रिटिश सरकार से क्षमा मांगी। छत्तीसगढ़ के राष्ट्रवादियों को सप्रे जी का यह कदम बहुत बुरा लगा, वे आक्रोशित हो उठे। उन्होंने इसका विरोध किया। रायपुर शहर में उग्र विचारों वाले युवकों ने उनके चित्र और प्रतीकात्मक पुतले बनाकर जलाए।
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