अ.भा. कांग्रेस कमेटी में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व तथा रोलेट एक्ट का विरोध

अ.भा. कांग्रेस कमेटी में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व (1918) -26 जनवरी 1918 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन दिल्ली में पं. मदनमोहन मालवीय की अध्यक्षता में हुआ। इस अधिवेशन में ई. राघवेन्द्र राव और सीएम ठक्कर ने हिस्सा लिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में मध्यप्रांत से 12 सदस्य लिए गए। इसमें छत्तीसगढ़ की राजनीतिक जागरूकता को देखते हुए यहां से ई. राघवेन्द्र राव तथा बैरिस्टर सी. एम ठक्कर को सदस्य के रुप में सम्मिलित किया गया।
रोलेट एक्ट का विरोध (1919) -सन् 1919 में रोलेट एक्ट के विरोध में देशव्यापी हड़ताल हुई। छत्तीसगढ़ में भी इस हड़ताल का प्रभाव पड़ा। रायपुर, धमतरी, बिलासपुर, जांजगीर, दुर्ग राजनांदगांव में स्थानीय कांग्रेसी नेताओं ने जन सभाएं आयोजित कर रोलेट एक्ट रुपी काले कानूनों का विरोध किया तथा जुलूस निकाले। 30 मार्च 1919 को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। सारे देश के साथ छत्तीसगढ़ में 30 मार्च 1919 को आम हड़ताल की गई। बिलासपुर में वामनराव लाखे, डॉ शिव दुलारे मिश्र, यदुनन्दन प्रसाद श्रीवास्तव, ठा. छेदीलाल बैरिस्टर, ई. राघवेन्द्र राव ने आम हड़ताल का आयोजन किया। इस दिन उन्होंने पचरी घाट में स्नान कर, काले वस्त्र धारण कर, एक विशाल जुलूस निकाला। इस जुलूस में ‘ रोलेट एक्ट’ विरोधी नारे लगाए गए। जुलूस पूरे बिलासपुर नगर में घूमने के पश्चात शनिचरी पड़ाव में सभा के रुप में तब्दील हो गया।
सभा को ठा. छेदीलाल बैरिस्टर ई. राघवेन्द्र राव, यदुनन्दन प्रसाद श्रीवास्तव ने संबोधित किया।सन् 1920 में भारत के कोने-कोने में खिलाफत आंदोलन हुआ। इस आंदोलन से छत्तीसगढ़ अप्रभावित नहीं रह सका। 17 मार्च 1920 को रायपुर के राजनीतिक सम्मेलन में एक खिलाफत समिति गठित की गई। इस सभा को राष्ट्रीय नेता असगर अली ने संबोधित किया। उसने अपने उद्बोधन में खिलाफत आंदोलन में हिन्दुओं के भाग लेने के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उस समय पं. रविशंकर शुक्ल ने कहा था- ‘अब हम लोग हिन्दू और मुसलमान नहीं रहे वरन् कट्टर हिन्दुस्तानी बन गए हैं।’ रायपुर की तरह बिलासपुर में भी खिलाफत समिति गठित की गई इसमें वजीर खाँ, अकबर खाँ, और हफीज हकीम खाँ थे।
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