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छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण क्रन्तिकारी घटनाये

छत्तीसगढ़ इतिहास : छत्तीसगढ़ के निर्वाचित प्रतिनिधि (1923) – नवंबर 1923 में मध्य प्रदेश और बरार की विधान सभा के लिए चुनाव हुए। स्वराज पार्टी ने 70 में से 42 सीटें जीतीं। छत्तीसगढ़ क्षेत्र से ई. राघवेंद्र और पंडित रविशंकर शुक्ल निर्वाचित हुए। उनके निर्वाचन में ‘सेवा समिति’ नामक एक राष्ट्रवादी संगठन का योगदान था। घनश्याम सिंह गुप्त, खूबचंद बघेल और सर्वदत्त बाजपेयी इसके सक्रिय सदस्य थे।

रायपुर की क्रांतिकारी घटना (1924)- 1924 में रायपुर के न्यायालय परिसर में एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी घटना घटी। दुर्ग से शेख मुंतज़िमुद्दीन नामक एक युवक रायपुर आया और न्यायालय परिसर में स्थित जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर तारकोल पोतकर और उसे जूतों की माला पहनाकर ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति अपना अविश्वास प्रकट किया।

महात्मा गांधी का अछूतोद्वार आंदोलन (1925-26)- दिसम्बर 1924 में महात्मा गांधी की अध्यक्षता में बेलगाँव में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। इस अधिवेशन में महात्मा गांधी ने हिंसा का त्याग कर रचनात्मक कार्यों पर बल दिया। राजिम निवासी पं. सुन्दरलाल शर्मा, महंत लक्ष्मीनारायण दास, नत्थूजी जगताप आदि अधिवेशन में भाग लेने बेलगाँव गए। इस अधिवेशन के बाद महात्मा गांधी अस्पृश्यता निवारण, खादी प्रचार और हिन्दू मुस्लिम एकता के कार्यक्रमों में जुट गए। मार्च 1925 में गांधीजी ने त्रावणकोर के वैकोम ग्राम के प्रसिद्ध महादेव मंदिर में हरिजनों को प्रवेश की अनुमति प्रदान की। इस घटना ने पं. सुन्दरलाल शर्मा को प्रभावित किया। 8 नवम्बर 1925 को राजिम में अस्पृश्यता निवारण हिन्दू सभा का आयोजन किया गया। इसमें छत्तीसगढ़ के देशभक्त, समाज सुधारक और धर्म गुरु शामिल हुए।

इस ऐतिहासिक सभा में निर्णय लिया गया कि अछूत जातियों को राजीवलोचन मंदिर में प्रवेश की अनुमति देना शास्त्र सम्मत है। 23 नवम्बर 1925 को पंडित सुन्दरलाल शर्मा तथाकथित अछूत जातियों का एक विशाल जुलूस लेकर राजिम के राजीवलोचन मंदिर में उन्हें प्रवेश दिलाने ले गए। सशस्त्र पुलिस और कट्टर सनातनी हिंदुओं की उपस्थिति से टकराव की आशंका से दलितों को रामचंद्र मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी गई। इस घटना का प्रभाव पूरे छत्तीसगढ़ पर पड़ा। इस अवसर पर देशभक्त नारायणराव मेघावले भी उनके साथ थे। पंडित सुन्दरलाल शर्मा ने रायपुर, धमतरी और आसपास के गांवों में जाकर छुआछूत मिटाने का प्रयास किया। तथाकथित अछूत जातियों को साफ-सफाई से रहने, शराब न पीने और जनेऊ धारण करने के लिए प्रोत्साहित किया। पंडित सुन्दरलाल शर्मा ने स्वयं अछूत जातियों के घरों में दूध पीकर छुआछूत मिटाने का प्रयास किया। इस कार्य में घनश्याम सिंह गुप्त, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, वामनराव लाखे, नारायणराव मेघावले भी उनके साथ हो लिए। इनके सहयोग से रायपुर में समाज सुधार हेतु ‘सतनामी आश्रम’ की स्थापना हुई।

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