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छत्तीसगढ़ का इतिहास : भारत छोड़ो आंदोलन में दुर्ग की भूमिका

छत्तीसगढ़ का इतिहास : भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा होते ही दुर्ग जिला भी पूर्णतः आंदोलन के लिए सजग व तत्पर हो उठा। ब्रिटिश प्रशासन ने दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी को अवैध घोषित कर दिया। महात्मा गांधी ने जेल जाने से पूर्व जो मंत्र दिया था उसे ‘करो या मरो’ को आधार मान कर दुर्ग जिले के अनेक संगठनों ने आंदोलन में प्रमुख भागीदारी की। ऐसे संगठनों में छत्तीसगढ़ सभा, नवयुवक मंडल दुर्ग किसान सभा तथा सतनामी आश्रम प्रमुख रुप से थे। ब्रिटिश प्रशासन ने आंदोलनात्मक गतिविधियों पर प्रारंभ से ही नियंत्रण स्थापित कर लिया। राष्ट्रीय एवं प्रांतीय नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में दुर्ग नगर में दुर्ग जिले के अनेक स्थानों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं व नेताओं ने जुलूस निकाले तथा प्रदर्शन किए। प्रशासन ने प्रारंभ से ही कठोर दमनात्मक रवैया चलाया। फलस्वरूप अनेक आंदोलनकारी दुर्ग जिले में गिरफ्तार किए गए। एक स्थानीय समाचार पत्र में यह विवरण प्रकाशित हुआ था-‘दुर्ग में गिरफ्तारियों की धूम मची है, प्रायः सभी प्रमुख नेता बारी-बारी से गिरफ्तार होते जा रहे हैं।’9 अगस्त 1942 को मोहनलाल वाकलीवाल, रत्नाकर झा (म्युनिसपल प्रेसिडेन्ट), श्री डोनगांवकर, केशवलाल गोमास्ता, गणेशप्रसाद, हेमराम, लक्ष्मणसिंह देशमुख, गिरफ्तार किए गए।

9 अगस्त 1942 को दुर्ग में नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में हड़ताल मनाई गई, बाजार में दुकानें बंद रही। म्युनिसपल और डिस्ट्रिक्ट कौंसिल के दफ्तर बंद रहे तथा हाई स्कूल में पिकेटिंग हुई जिससे अनेक विद्यार्थी शाला नहीं जा सके 19 अगस्त 1942 को व्ही. वाई तामसकर एम.एल.ए. चेयरमेन डिस्ट्रिक्ट कौंसिल, बेमेतरा में प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तार किए गए। इस दिन बालोद, पाटन में भी कुछ आंदोलनकारियों की गिरफ्तारियां की गई। 10 एवं 11 अगस्त 1942 को दुर्ग, पाटन, बेमेतरा, धमधा, साजा देवकर आदि अनेक स्थानों पर दुकानें बंद रहीं। दुर्ग गवर्नमेन्ट हाई स्कूल में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने पिकेटिंग की। ब्रिटिश प्रशासन के अधिकारियों ने आंदोलन को दबाने की पूरी कोशिश की। 10 एवं 11 अगस्त को चण्डीप्रसाद, जगदीशचन्द्र, नरसिंहप्रसाद, रामरतनप्रसाद, सुखनन्दन, शीतलाप्रसाद, शम्भुदयाल, रामाधार, गोवर्धनलाल शर्मा, धनराज देशलहरा, नत्थूलाल, अमरचन्द्र वर्मा, भंगुलाल श्रीवास्तव, बंशीलाल स्वर्णकार, गेंदलाल, भागवती चन्द्राकर, नरेन्द्र कटारे गिरफ्तार किए गए।

भारत छोड़ो आंदोलन के समय पाटन में रामदेव आचार्य के नेतृत्व में एक विशाल प्रदर्शन हुआ जिसका उद्देश्य पुलिस को खादी की बर्दी पहनाना था। 20 हजार की भीड़ ने पाटन थाने में घेर लिया। भीड़ जब अपनी मांग पर डटी रही तो दुर्ग जिला अधीक्षक ने भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। परिणामस्वरूप 7 लोग मारे गए। पुलिस ने कई आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया। आचार्य रामदेव शास्त्री, शिवराम, लखनलाल, सुखरुराम, अयोध्याप्रसाद, उमराव, कन्हैया, रामनारायण, उदयराम, मधुमंगल प्रसाद सावर्णी, खिलावनसिंह बघेल आदि गिरफ्तार किए गए। पाटन क्षेत्र का हर परिवार आंदोलनकारियों का घर था।

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