छत्तीसगढ़ का इतिहास : अगस्त दिवस का आयोजन (9 अगस्त 1946) –

छत्तीसगढ़ का इतिहास : अगस्त दिवस (9 अगस्त 1946) का उत्सव – वर्ष 1942 भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण वर्ष था। 9 अगस्त 1942 को भारत ‘भारत छोड़ो’ के नारों से गूंज उठा। इस तिथि को प्रतिवर्ष अगस्त दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष पं. जवाहरलाल नेहरू ने जुलाई 1946 में सभी प्रांतीय समितियों को एक पत्र भेजा, जिसमें 9 तारीख को अगस्त दिवस मनाने के संबंध में आवश्यक निर्देश थे। अगस्त दिवस मनाने के संबंध में पं. नेहरू का पत्र केंद्रीय प्रांतीय कांग्रेस तक पहुँचा। प्रांतीय कांग्रेस कमेटी ने सभी जिला और स्थानीय समितियों को अगस्त दिवस मनाने के संबंध में निर्देश जारी किए। छत्तीसगढ़ की जिला समितियों ने 9 अगस्त 1946 को जिला मुख्यालयों में और तहसील समितियों ने तहसील मुख्यालयों में ‘अगस्त दिवस’ मनाया। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग में लगभग सभी स्थानों पर सार्वजनिक सभाओं का आयोजन किया गया और सभाओं में ध्वजारोहण और ध्वज वंदन की गतिविधियाँ की गईं। सुबह 5 बजे हर मोहल्ले से जुलूस निकाला गया।
सुबह का कार्यक्रम 7 बजे सुभाष चौक पहुंचकर संपन्न हुआ। शाम 4.30 बजे बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के घर से जुलूस शुरू हुआ और नगर भ्रमण के बाद शाम 5.30 बजे सुभाष चौक पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। सभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले झंडा फहराते समय सेठ रामलाल की भौंह पर रॉड की नोक लग गई और वह खून से लथपथ हो गई। उन्होंने उसी हालत में सभा की कार्यवाही पूरी की। सभा में गोपाल राव पवार, पं. गिरधारी लाल, हजारी लाल जैन और अध्यक्ष सेठ रामलाल जी ने ओजस्वी भाषण दिए। जनता ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया और इस तरह धमतरी में भी भारत छोड़ो आंदोलन के लिए माहौल बनने लगा।
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