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कांकेर रियासत का इतिहास: संस्थापक से भारतीय संघ में विलय तक

कांकेर रियासत का कुल क्षेत्रफल 1429 वर्ग मील था। राजा कुंहर देव को इस रियासत का संस्थापक माना जाता है। कुंहरदेव के बाद के राजाओं का कार्यकाल अंधकार और अनिश्चितता से भरा है। इस रियासत का कालानुक्रमिक इतिहास राहिपाल नामक शासक से प्राप्त होता है। राहिपाल के कार्यकाल में कांकेर मराठों के अधीन आ गया था। 1854 ई. तक कांकेर रियासत पर मराठों का प्रभाव रहा। इस रियासत के प्रमुख शासक नरहरदेव थे। ब्रिटिश भारत के वायसराय जॉन लॉरेंस ने 20 मई 1865 को कांकेर के राजा नरहरदेव को एक सनद प्रदान की, जिसमें कांकेर राज्य के शासक को एक सामंत शासक का दर्जा दिया गया था। 1889 में नरहरदेव मानसिक रूप से बीमार हो गए। ऐसी स्थिति में रियासत के प्रशासन के लिए एक अंग्रेज दीवान नियुक्त किया गया। 1911 में ब्रिटिश प्रशासन ने कोमलदेव को 9 तोपों की सलामी प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया। 1910 के बस्तर विद्रोह के दौरान, कोमलदेव ने विद्रोह को दबाने में अंग्रेजों की पूरी मदद की। भानुप्रतापदेव 8 जनवरी 1925 को कांकेर vके शासक बने। राजा भानुप्रतापदेव ‘चैंबर ऑफ प्रिंसेस’ के सदस्य थे। स्वतंत्रता के बाद, भानुप्रतापदेव ने कांकेर रियासत का भारतीय संघ में विलय कर दिया।

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