बाँधन और मुक्ति: अपनी इच्छाशक्ति से जीवन बदलें

रेशम का कीड़ा अपने लिए बुने हुए खोल में ही फंसा रहता है। मकड़ी को बाँधने वाला जाल उसका अपना बनाया हुआ होता है। इसे उसकी सहज प्रवृत्ति की प्रतिक्रिया ही कहा जा सकता है। जब रेशम का कीड़ा अपने खोल से बाहर निकलने का विचार करता है, तो उसे कुतरने में कोई कठिनाई नहीं होती, ठीक वैसे ही जैसे वह बुनता है। मकड़ी जब चाहे तब अपना जाल बुन सकती है। विषय-वासनाओं, आसक्ति और अहंकार को प्राथमिकता देकर मनुष्य दुःख और संताप के दु:ख से ग्रस्त रहता है। यदि वह अपने जीवन की दिशा बदल दे, तो उसे मुक्त अवस्था का आनंद प्राप्त करने से कौन रोक सकता है? मनुष्य को अपने अनुसार सोचने और कार्य करने की स्वतंत्रता है। वह इस स्वतंत्रता का उपयोग अच्छे या बुरे, सही या गलत, किसी भी दिशा में स्वतंत्र रूप से कर सकता है। बंधना उसके हाथ में है, और उससे मुक्त होना भी उसके हाथ में है। सर्वगुण संपन्न मानव जीवन और सर्वत्र स्वतंत्रता का उपहार देकर, ईश्वर ने अपनी कृपा सिद्ध की है। अब यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह इसका बुद्धिमानी से उपयोग करके मुक्ति प्राप्त करता है या मोह और लोभ के जाल में फँसकर इसका दुरुपयोग करता है। दुःख या आनंद – दोनों ही संभावनाएँ व्यक्ति के अपने हाथ में हैं।
नए खबरों के लिए बने रहे सटीकता न्यूज के साथ।




