छत्तीसगढ़ की मानसूनी जलवायु: बंगाल की खाड़ी की हवाओं से भीगती धरती का विज्ञान

उत्तरापथ और दक्षिणापथ के मध्य भाग में स्थित होने के कारण छत्तीसगढ़ में मानसूनी जलवायु की सभी विशेषतायें मिलती है। ‘मानसून’ शब्द अरबी से आया है, जिसका अर्थ है ‘ऋतु’। आज मानसून का व्यापक अर्थ हवाओं से है, जो सूर्य के तापमान से परिचालित होती है। भारत में 21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण होता है। सूर्य की किरणें सीधी होती जाती है तथा 21 जून को सूर्य कर्क रेखा के निकट लम्बवत होता है। कर्क रेखा उत्तरी छत्तीसगढ़ से होकर गुजरती है। अतः तेज धूप के परिणामस्वरूप तापमान बढ़ता जाता है और उत्तरी-पश्चिमी भारत में न्यून वायु-भार का केन्द्र स्थापित हो जाता है और मानसूनी हवाएँ चलने लगती है। सागर से आने वाली इन मानसूनी हवाओं से भारत औ संभवतः छत्तीसगढ़ में वर्षा होती है।
छत्तीसगढ़ में मानसून की वर्षा अरब सागर को वायुधारा के बजाय बंगाल की खाड़ी की वायुधारा से होती है।21 सितम्बर आते-आते जब सूर्य दक्षिणायन होने लगता है, तब भारत पर सूर्य को किरणें तिरछी होने लगती है। इस समय छतीसगढ़ में सूखी मानसूनी हवाओं की दिश उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर होती है। उत्तर से आने के कारण हवावे ठंडी होती है। जाड़े के मौसम में इन हवाओं के साथ आने वाले चक्रवात छत्तीसगढ़ में ठंडक पहुँचाते हैं।मानसून के मौसम के दौरान बंगाल की खाड़ी में हवा का दबाव उत्पन्न हो जाता है, जो भारत के पूर्वी तट को पार करता है और पश्चिम दिशा की ओर बढ़ता है। देश के मध्य भागों को पार करते समय ये तूफान छत्तीसगढ़ पर प्रभाव डालते हैं, जिसके परिणामस्वरूप दूर-दूर तक भारी वर्षा होती है और तेज हवाएँ चलती है। कभी-कभी अक्टूबर माह में बंगाल की खाड़ी से उठने वाला तूफान भी छत्तीसगढ़ को प्रभावित करता है। समूचे वर्ष में कभी-कभी गरज के साथ वर्षा होती है, जिसकी बारंबारता अक्टूबर से जनवरी की अवधि में बहुत कम होती है और ग्रीष्म ऋतु के अंतिम काल में तथा दक्षिण-पश्चिम मानसून महीनों में अत्यधिक वर्षा होती है। ग्रीष्म के महीनों में कभी-कभी आँधियाँ और बवण्डा भी आते हैं।
जलवायु के आधार पर छत्तीसगढ़ का निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है:
-झारखण्ड प्रक्षेत्र – कर्क रेखा इस भाग के निकट से गुजरती है। इसी कारण यहाँ गर्मियों में कड़क गर्मी तथा सर्दियों में साधारण सर्दी पड़ती है। यह प्रक्षेत्र मेकला-श्रृंखला से सँटा हुआ है।
छत्तीसगढ़ का मैदान – यहाँ गर्मियों में अधिक गर्मी तथा सर्दियों में साधारणसर्दी पड़ती है। इस मैदान में जंगल अधिक हैं। इस मैदान की जलवायु गर्म और सर्द है। बस्तर का पहाड़ी प्रक्षेत्र इस भाग में गर्मियों में अधिक गर्मी तथा सर्दियों में अधिक सर्दी पड़ती है। पहाड़ी अंचल होने के कारण यहाँ की जलवायु ठंडी तथा अधिक वर्षा के कारण नम है।तापमान और वर्षा : छत्तीसगढ़ में उच्चतम तापमान रायगढ़ में मई में रहता है। लगभग 42.8 डिग्री तक। चाँपा में यह कभी-कभी 45 सेण्टीग्रेड तक पहुँच जाता है। निम्नतम तापमान अम्बिकापुर में होता है और दिसम्बर महीने में यह 8 डिग्री सेण्टीग्रेड तक रहता है। सबसे अधिक वर्षा चांपा में होती है, तथा सबसे कम वर्षा कवर्धा में होती हैछत्तीसगढ़ समग्र116 भारत के अन्य भागों के समान ही छत्तीसगढ़ में तीन प्रमुख ऋतुएं होती हैं-
ग्रीष्म मार्च से जून
वर्षा – जुलाई से अक्टूबर
शोत – नवम्बर से फरवरी
ग्रीष्म ऋतु : ग्रीष्म ऋतु मार्च माह से शुरू होकर जून माह के दूसरे या तीसरे सप्ताहतक रहती है। प्रदेश में इस ऋतु में तापमान मार्च से जून तक लगातार बढ़ता है। मई माह में दुर्ग जिले में तापमान अधिक रहता है। लेकिन वहाँ दिन में अधिक तेज गर्मी नहीं पड़ती, जबकि सरगुजा जिले का तापमान कम रहता है तथा रातें ठण्डी हो जाती है। ग्रीष्मत्रऋतु सूखी और वायुमण्डल में नमी कम रहती है। आकाश में बादल नहीं होते है। गर्मी में धूल भरी हवायें चलती है। गर्मी की ऋतु में प्रदेश में तेज धूप पड़ने के कारण हवा गर्म होकर ऊपर उठने लगती है और हवायें दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पश्चिम के इन गर्म प्रदेशों की ओर बहने लगती हैं। ये हवायें समुद्र की ओर से आने के कारण भाप भरी होती है।
वर्षा ऋतु : प्रदेश में वर्षा जून के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर माह तक होती है। जून के महीने में भाप भरी हवायें दक्षिण व दक्षिण-पश्चिम दिशा में चलने लगती है, जिनसे राज्य में वर्षा होती है। छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक वर्षा जुलाई अगस्त माह में होती है।
शीत ऋतु : वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद नवम्बर माह तक शीत ऋतु प्रारम्भ हो जाती है। इस ऋतु में दिन छोटे तथा रातें बड़ी होती है। तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। दिसम्बर और जनवरी माह में सर्वाधिक सर्दी पड़ती है, किन्तु छत्तीसगढ़ में सर्दी कम पड़ती है। इस ऋतु में मौसम सूखा रहता है। किन्तु कभी-कभी दिसम्बर और जनवरी माह में राज्य में हल्की वर्षा हो जाती है। यह वर्षा गेहूं, चना, मसूर आदि फसलों के लिये बहुत लाभकारी होती है।
निष्कर्ष : छत्तीसगढ़ उष्ण कटिबंधीय मानसून का प्रक्षेत्र है। समुद्र से दूर होने के कारण यह समकारी प्रभाव से दूर है। कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण यह गर्म प्रदेश है। यहाँ मई का महीना सबसे गर्म होता है। दिसम्बर-जनवरी ठण्डे महीने हैं।
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