2026 गणतंत्र दिवस: नदियों के नाम पर गैलरियां और नई भैरव बटालियन की पहली मार्च

New Delhi। 2026 के गणतंत्र दिवस परेड में एक नई परंपरा देखने को मिलेगी, जिसमें दर्शकों के बैठने की जगहों को थीम पर आधारित बनाया जाएगा। पहली बार, परेड मार्ग के किनारे बैठने की जगहों को नंबरों से नहीं पहचाना जाएगा। इसके बजाय, बैठने की जगहों का नाम देश की प्रमुख नदियों के नाम पर रखा गया है। पहले, इन जगहों को सिर्फ़ नंबरों से पहचाना जाता था। इन गैलरियों का नाम यमुना, ब्यास, ब्रह्मपुत्र, गंगा, तीस्ता, चंबल, सतलुज, सोन, चिनाब, सोन, राप्ती, वैगई, पेरियार, गंडक, पेन्नार, नर्मदा, घाघरा, गोदावरी, कृष्णा, महानदी, सिंधु, कोसी, झेलम और कावेरी जैसी नदियों के नाम पर रखा गया है। ये वे नदियाँ हैं जो देश के अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों से होकर बहती हैं और स्थानीय आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं। सदियों से, इन नदियों ने देश की सभ्यता, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को भी आकार दिया है।
पांच भैरव बटालियन पहले ही बन चुकी हैं: पहली बार, भारतीय सेना की नई भैरव बटालियन कर्तव्य पथ पर मार्च करेंगी और सुप्रीम कमांडर को सलामी देंगी। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद कारगिल से इन नई लाइट कमांडो बटालियन के गठन की घोषणा की थी। अधिकारियों के अनुसार, पांच भैरव बटालियन पहले ही बन चुकी हैं। इस गणतंत्र दिवस पर, ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लड़ाकू विमान भी कर्तव्य पथ के ऊपर गरजेंगे। मुख्य आकर्षणों में से एक विशेष सिंदूर फॉर्मेशन होगा, जो ऑपरेशन की सफलता और संकल्प का प्रतीक होगा। राफेल, सुखोई, जगुआर और मिग-29 विमानों सहित एक दर्जन से ज़्यादा लड़ाकू विमान कर्तव्य पथ के ऊपर फॉर्मेशन में उड़ान भरेंगे। इसके अलावा, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और परिवहन विमानों के कई अन्य फॉर्मेशन भी इस भव्य हवाई प्रदर्शन का हिस्सा होंगे।
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