केवल एक प्रतिशत वयस्क महिलाओं को स्तन कैंसर की जानकारी
भारत में हर साल लाखों महिलाएं स्तन कैंसर के कारण अपनी जान गंवाती हैं। अध्ययनों के अनुसार प्रति एक लाख महिलाओं में मृत्यु दर 12.7 है और स्तन कैंसर रोगियों के पांच साल तक जीवित रहने की संभावना 66.4 प्रतिशत है।

india : इसके बावजूद इस जानलेवा बीमारी के बारे में जागरूकता की काफी कमी है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में 45 वर्ष और उससे अधिक आयु की केवल एक प्रतिशत महिलाएं ही मैमोग्राफी करवाती हैं। मुंबई और वाराणसी के टाटा मेमोरियल सेंटर के शोधकर्ताओं ने पाया कि स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राफी कराने में केरल की महिलाएं सबसे आगे हैं और नागालैंड में यह दर सबसे कम है।
भारत में यह दर दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। अफ्रीकी देशों में जहां 4.5 प्रतिशत महिलाएं मैमोग्राफी कराती हैं, वहीं कोरिया और जापान जैसे एशियाई देशों में यह दर 40 से 60 प्रतिशत और यूरोपीय देशों और अमेरिका में 84 प्रतिशत है। देश के अंदर राज्यवार आंकड़ों के विश्लेषण के दौरान पाया गया कि मैमोग्राफी का सबसे ज्यादा प्रचलन केरल और कर्नाटक में है, जहां यह दर क्रमश: 4.5 प्रतिशत और 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई। नागालैंड में यह आंकड़ा शून्य के करीब था, जबकि आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड में यह दर क्रमशः 0.1 प्रतिशत और 0.27 प्रतिशत थी। बायोमेड सेंट्रल (बीएमसी) पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि स्तन कैंसर का जल्द पता लगाने के उद्देश्य से शुरू किए गए एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम का कवरेज अपर्याप्त है।
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