
बस्तर दशहरा की अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है, जिसे अब अंतर्राष्ट्रीय पटल पर ले जाने की योजना है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को वैश्विक पहचान भी मिलेगी। बस्तर पर्यटन सर्किट विकसित करने, तीरथगढ़ जलप्रपात पर पारदर्शी पुल बनाने और स्थानीय युवाओं को पर्यटक गाइड के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना से रोजगार, निवेश और सांस्कृतिक जागरूकता तीनों पहलुओं का समाधान होता है। बस्तर के घुड़नारास गांव को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के रूप में मान्यता मिलना इसका प्रमाण है। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में सरकार बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे, कैम्पिंग और इको टूरिज्म की सुविधाएं विकसित कर रही है। बस्तर जिले के कोसमटेडा सिंचाई जलाशय को अब इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे यहां की महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। चित्रकोट जलप्रपात क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
चस्तर में विकास का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सकारात्मक सोच बहुत जरूरी है। युवाओं को खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें मोह और भटकाव के रास्ते से दूर रखना भी बहुत जरूरी है। इसे समझते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर ‘बस्तर ओलम्पिक’ जैसे बड़े खेल महोत्सव का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन में 1 लाख 65 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में युवाओं ने इसमें अपनी सहभागिता दर्ज की। इसके साथ ही सांस्कृतिक गतिविधियों से संबंधित ‘बस्तर पण्डुम महोत्सव’ का भी पिछले दिनों गरिमामय आयोजन किया गया। महोत्सव में आदिवासी नृत्य, गीत, नाटक और वाद्य यंत्रों, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, शिल्प-चित्रकला और आदिवासी व्यंजनों पर आधारित प्रतियोगिताएं और प्रदर्शनियां आयोजित की गईं, जिससे लोगों को बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति से रू-ब-रू होने का मौका मिला। इस महोत्सव में 47000 से अधिक स्थानीय कलाकारों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
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