खून की “खुशबू” असल में आयरन की नहीं, बैक्टीरिया की है! जब हमें कट लगता है और खून की गंध आती है, तो वो असल में हमारे खून का नहीं, बल्कि त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया द्वारा आयरन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया की वजह से होती है।

शार्क मीलों दूर से खून को सूँघ सकती हैं! शार्क इतनी संवेदनशील होती हैं कि वो समुद्र में 1 बूंद खून को 1 लाख लीटर पानी में भी सूँघ सकती हैं।

रक्त का रंग हमेशा लाल नहीं होता! कुछ जानवरों का खून अलग रंग का होता है: – ऑक्टोपस का खून – नीला (Copper की वजह से) – घोंघा (Snail)नीलाकेकड़ानीला या हराकीड़े-मकोड़े – कुछ का खून पीला या पारदर्शी होता है।

बिना रक्त के भी जिंदा रह सकते हैं कुछ जीव! जैसे आइस फिश (Antarctic Icefish) का कोई RBC या हीमोग्लोबिन नहीं होता, फिर भी वो जीवित रहता है – ठंडे पानी में ऑक्सीजन सीधे त्वचा से ले लेता है।

आपके रक्त से आपकी पहचान और बीमारी दोनों बताई जा सकती हैं! रक्त में मौजूद DNA से किसी व्यक्ति की पूरी वंशावली, अनुवांशिक रोग, और संभावित भविष्य की बीमारियाँ जानी जा सकती हैं।

रक्त मस्तिष्क (Brain) में जाने से पहले ‘फिल्टर’ होता है! इसे Blood-Brain Barrier कहते हैं। यह अवरोध खतरनाक तत्वों को मस्तिष्क में प्रवेश से रोकता है। यह एक सुरक्षा दीवार की तरह है।

हर दिन आपका हृदय करीब 7000 लीटर खून पंप करता है! यह इतनी मात्रा है कि एक टैंकर भर जाए। और ये काम हृदय हर मिनट कर रहा होता है – बिना रुके।

खून में 30 से ज़्यादा प्रकार के रक्त समूह होते हैं! हम आमतौर पर A, B, AB, O जानते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने अब तक 30 से अधिक रक्त समूह प्रणालियाँ खोजी हैं – जैसे Duffy, Kidd, Lutheran, Kell, Diego आदि।

खून से भावनाओं का पता लगाया जा सकता है! हाल के अध्ययन बताते हैं कि तनाव, डर, प्रेम और उत्साह जैसे भावों में रक्त में रसायनिक बदलाव होते हैं – जैसे कोर्टिसोल और ऑक्सीटोसिन का स्तर बदलता है।

रक्त पीने वाली बीमारी – Clinical Vampirism! यह एक दुर्लभ मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति को दूसरों का खून पीने की इच्छा होती है। इसे Renfield’s Syndrome कहते हैं।