प्रेरणा

वास्तविक शक्ति त्याग, दृढ़ता और चरित्र-निर्माण से ही प्राप्त होती है

संसार ऐसे स्त्री-पुरुषों से भरा पड़ा है जो आनंद, उत्साह और नई चीज़ें चाहते हैं, वे हँसना चाहते हैं, वे रोना चाहते हैं, लेकिन वे अपने भीतर शक्ति और शांति उत्पन्न नहीं करना चाहते। वे अपनी कमज़ोरियों पर विजय नहीं पाना चाहते, बल्कि जो भी शक्ति उनमें है उसे नष्ट कर देना चाहते हैं। ऐसे स्त्री-पुरुष बहुत कम हैं जिनके पास वास्तविक शक्ति और प्रभाव है, क्योंकि ऐसे स्त्री-पुरुष और भी कम हैं जो उस शक्ति और प्रभाव को प्राप्त करने के लिए आवश्यक त्याग, दृढ़ता और धैर्य के साथ चरित्र निर्माण करने को तत्पर हैं। अपने विचारों को बार-बार बदलना स्वयं को कमज़ोर और शक्तिहीन बनाना है। मनुष्य तभी प्रगति कर सकता है जब उसकी बुद्धि और चेतना धीरे-धीरे जागृत हो। कमज़ोर और बलवान पुरुषों का अंतर व्यक्तिगत इच्छाशक्ति से नहीं, बल्कि उस मानसिक शक्ति से निर्धारित होता है जिसमें उनके ज्ञान की परीक्षा होती है, क्योंकि एक जिद्दी व्यक्ति अक्सर कमज़ोर और मूर्ख होता है।

जो व्यक्ति मनोरंजन में रुचि रखता है, चहल-पहल पसंद करता है, नवीनता चाहता है और भावनाओं का शिकार हो जाता है, उसके पास वह ज्ञान नहीं होता जो उसे संतुलन, स्थिरता और प्रभाव प्रदान करता है। उसका चंचल स्वार्थ उसे शक्ति प्रदान करता है। जब कोई व्यक्ति अपनी चंचल स्वार्थी भावनाओं को रोककर अपनी आंतरिक शक्ति को बढ़ाने लगता है, तो वह ऊँचा उठता है और शांतिपूर्ण वातावरण में पहुँचता है। अपने जीवन को एक सिद्धांत पर चलाना अपार शक्ति प्राप्त करने की कुंजी है। बहुत अन्वेषण, कष्ट और त्याग के बाद, जब हृदय में दिव्यता का प्रकाश उत्पन्न होता है, तब स्वर्गीय सुख की प्राप्ति होती है। जो इस प्रभाव का अनुभव करता है, वह इधर-उधर नहीं भटकता, बल्कि अपनी अंतरात्मा में लीन हो जाता है। वह इंद्रियों का दास नहीं रहता। वह स्वयं अपने भाग्य के मंदिर का निर्माता बन जाता है।

जब कोई व्यक्ति सुखपूर्वक जीवन जीता है, तो उसके लिए यह कहना आसान होता है कि वह शांति और सार्वभौमिक प्रेम के सिद्धांत में विश्वास करता है, लेकिन जब उसके सुख को ठेस पहुँचती है या उसके सुख छिन जाने का भय होता है, उस समय यदि वह उत्तेजित होकर लड़ने को तैयार हो जाता है, तो समझ लीजिए कि उसे शांति, भाईचारे और प्रेम में कोई विश्वास नहीं है और न ही ये उसके जीवन का आश्रय हैं, बल्कि वह संघर्ष, स्वार्थ और घृणा में लिप्त है। वास्तव में, शक्तिशाली व्यक्ति वह है जो सत्य के सिद्धांत का परित्याग तब भी नहीं करता जब उसे भय हो कि उसका सारा धन, संपत्ति और वैभव नष्ट हो जाएगा और यहाँ तक कि उसका जीवन भी नहीं बचेगा। ऐसे व्यक्ति के वचन और कर्म संसार में अमर रहते हैं और उसकी मृत्यु के बाद भी लोग उसे श्रद्धापूर्वक स्मरण और पूजन करते हैं। अंश: कीर्ति तुपावर द्वारा अनुवादित

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