विज्ञान

सूरत के छात्रों ने रचा इतिहास, AI से चलने वाली भारत की पहली ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक सुपरबाइक ‘गरुड़’

Surat, Gujarat। सूरत, गुजरात के स्टूडेंट्स ने एक इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल बनाई है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से खुद चल सकती है। तीन मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने यह प्रोटोटाइप बनाया है, जिसका नाम गरुड़ रखा गया है, जिसे भारत की पहली AI-पावर्ड ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक सुपरबाइक बताया जा रहा है। खास बात यह है कि यह बाइक लगभग 50 प्रतिशत स्क्रैप और रीसायकल किए गए मटीरियल से बनाई गई है, जो इसे वेस्ट-टू-बेस्ट इंजीनियरिंग का एक शानदार उदाहरण बनाती है।

शानदार रेंज और चार्जिंग:
परफॉर्मेंस के मामले में, गरुड़ किसी भी कमर्शियल इलेक्ट्रिक बाइक से पीछे नहीं है। हल्की लिथियम-आयन बैटरी से लैस, यह मोटरसाइकिल इको मोड में 220 किलोमीटर और स्पोर्ट मोड में 160 किलोमीटर की रेंज देने का दावा करती है। यह आंकड़ा फिलहाल बाजार में मौजूद ज़्यादातर इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर से काफी ज़्यादा है। हैरानी की बात यह है कि इसकी बैटरी सिर्फ दो घंटे में पूरी तरह से चार्ज हो सकती है।

क्या गरुड़ प्रोडक्शन तक पहुंचेगी?
इसके एडवांस्ड AI फीचर्स, इनोवेटिव सेफ्टी सिस्टम और फ्यूचरिस्टिक डिज़ाइन को देखते हुए, गरुड़ जैसी मोटरसाइकिल के कमर्शियल प्रोडक्शन की संभावनाएं काफी मज़बूत लगती हैं। हालांकि यह अभी एक प्रोटोटाइप है, लेकिन यह प्रोजेक्ट निश्चित रूप से दिखाता है कि भारत के युवा इंजीनियर सीमित संसाधनों के बावजूद मोबिलिटी के भविष्य को आकार देने में सक्षम हैं।

गरुड़ रास्पबेरी पाई और वॉयस कमांड से चलता है: गरुड़ का दिमाग एक रास्पबेरी पाई मॉड्यूल है, जो इस बाइक के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के तौर पर काम करता है। यह छोटा लेकिन पावरफुल कंप्यूटर सिस्टम वाई-फाई के ज़रिए वॉयस कमांड को समझने और उन्हें पूरा करने में सक्षम है। डेमो के दौरान, बाइक को अपनी स्पीड खुद कंट्रोल करते और “स्टॉप” जैसे वॉयस कमांड पर तुरंत रिस्पॉन्ड करते देखा गया। यह मोटरसाइकिल तीन मोड में चल सकती है: मैनुअल, मोबाइल फोन-कंट्रोल्ड और पूरी तरह से ऑटोनॉमस मोड।

फ्यूचरिस्टिक डिज़ाइन और हाई-एंड फीचर्स: इसमें हबलेस व्हील्स हैं, जो इसे बहुत फ्यूचरिस्टिक लुक देते हैं। इस प्रोटोटाइप में प्रीमियम फीचर्स शामिल हैं जो आमतौर पर सिर्फ़ महंगी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में मिलते हैं। इसमें GPS नेविगेशन के साथ एक फुल टचस्क्रीन डैशबोर्ड, लाइव ट्रैफिक अपडेट के लिए आगे और पीछे कैमरे, और वायरलेस मोबाइल चार्जिंग भी शामिल है। बाइक के सेफ्टी सिस्टम में AI एक अहम भूमिका निभाता है। हाई-रेंज सेंसर लगातार आस-पास के माहौल पर नज़र रखते हैं और किसी भी रुकावट का पता लगाते हैं। गरुड़ में दो-स्तरीय सेफ्टी प्रोटोकॉल है। अगर कोई गाड़ी या चीज़ 12 फीट के दायरे में आती है, तो बाइक अपने आप स्पीड कम कर देती है। अगर रुकावट तीन फीट के दायरे में आती है, तो सिस्टम बिना किसी इंसान के दखल के ऑटोमैटिक ब्रेकिंग एक्टिवेट कर देता है, और बाइक पूरी तरह से रुक जाती है।

गरुड़ को बनाने वाले छात्र सूरत की भगवान महावीर यूनिवर्सिटी के शिवम मौर्य, गुरप्रीत अरोड़ा और गणेश पाटिल हैं। इन तीनों ने इस प्रोजेक्ट पर लगभग एक साल तक काम किया और लगभग 1.8 लाख रुपये की लागत से अपने आइडिया को हकीकत में बदला। टेस्ला की ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी से प्रेरित होकर, छात्रों का मकसद यह दिखाना था कि भविष्य की स्मार्ट मोबिलिटी को लोकल रिसोर्स और रीसायकल किए गए पार्ट्स का इस्तेमाल करके कम लागत में बनाया जा सकता है।

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