रिलायंस का बड़ा फैसला, रूस से तेल आयात रोकने से जनवरी में रिकॉर्ड गिरावट के संकेत

रिलायंस इंडस्ट्रीज के रूस से कच्चा तेल न खरीदने के फैसले से जनवरी में रूसी तेल का इंपोर्ट कई सालों के निचले स्तर पर जा सकता है। रिलायंस ने कहा कि उसे जनवरी में रूस से तेल की कोई खेप मिलने की उम्मीद नहीं है। रिलायंस का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रविवार की चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका भारत पर इंपोर्ट ड्यूटी और बढ़ा सकता है। रिलायंस ने सोशल मीडिया पर कहा कि पिछले तीन हफ्तों से रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल की कोई खेप नहीं आई है।
दरअसल, 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, भारत रियायती रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा। तब से, भारत ने रूस से 144 बिलियन यूरो का कच्चा तेल खरीदा है। इस दौरान, चीन सबसे बड़ा खरीदार बन गया, जिसने रूस से 210.3 बिलियन यूरो का कच्चा तेल इंपोर्ट किया। भारत दूसरे स्थान पर है। इन खरीद पर पश्चिमी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिन्होंने रूस के एनर्जी सेक्टर पर प्रतिबंध लगाए हैं। उनका तर्क है कि तेल से होने वाली कमाई मॉस्को के युद्ध प्रयासों को फाइनेंस करने में मदद करती है। पिछले साल, अमेरिका ने रूसी तेल की भारी खरीद के लिए पेनल्टी के तौर पर भारतीय सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी दोगुनी करके 50 प्रतिशत कर दी थी।
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