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राष्ट्रपति मुर्मू का संसद में संदेश: राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण पर एकजुट हों

Senior Reporter India| नई दिल्ली: संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार की उपलब्धियों, नीतिगत प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा को देश के सामने रखा। अपने संबोधन में उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान, सामाजिक न्याय के दायरे के विस्तार और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदमों जैसे अहम विषयों पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने संसद सदस्यों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित, देश की सुरक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर गंभीर और सकारात्मक चर्चा करें। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार समाज के हर वर्ग—दलितों, पिछड़े तबकों, वंचित समुदायों और आदिवासियों—के कल्याण के लिए संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कोई देश अपनी परंपराओं और मूल्यों का सम्मान करता है, तो वैश्विक मंच पर भी उसे आदर मिलता है। इसी संदर्भ में उन्होंने यूनेस्को द्वारा दिवाली को मान्यता दिए जाने का जिक्र किया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में विचारों का अलग-अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्र निर्माण से बड़ा कोई लक्ष्य नहीं हो सकता। महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सभी इस बात पर सहमत थे कि कुछ विषय राजनीति से परे होते हैं।

राष्ट्रपति ने सांसदों से विकसित भारत के लक्ष्य, रोज़गार सृजन, आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वच्छता और देश की एकता जैसे मुद्दों पर साझा प्रयास करने का आह्वान किया।

देश की आर्थिक और कृषि उपलब्धियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि युवा, किसान, श्रमिक और उद्यमी लगातार विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका मजबूत कर रहे हैं। बीते वर्ष भारत ने 350 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया। 150 मिलियन टन उत्पादन के साथ भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक बन चुका है। मछली उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान हासिल करना ब्लू इकोनॉमी में उसकी सफलता को दर्शाता है। वहीं दूध उत्पादन के क्षेत्र में भी भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों में शामिल है, जो सहकारी आंदोलन की मजबूती का प्रमाण है।

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