तंबाकू और सिगरेट पर टैक्स का बड़ा वार, कीमतें बढ़ेंगी और बिक्री घटने के आसार

Senior Reporter India | नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने तंबाकू उद्योग पर शिकंजा कसते हुए सिगरेट, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों के टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। रविवार से इन उत्पादों पर अब अधिकतम 40 प्रतिशत GST के साथ अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी, हेल्थ सेस और नेशनल सिक्योरिटी सेस भी लागू कर दिया गया है।
सरकार के इस फैसले के बाद जुलाई 2017 से लागू 28 प्रतिशत GST और कंपेंसेशन सेस की पुरानी व्यवस्था खत्म हो जाएगी। अब चबाने वाले तंबाकू, खैनी, जरदा और गुटखा जैसे उत्पादों पर टैक्स की गणना पैकेट पर छपी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) के आधार पर की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत पान मसाला निर्माताओं को 1 फरवरी से नए सेस कानून में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा। साथ ही सभी पैकिंग मशीनों पर CCTV कैमरे लगाना जरूरी कर दिया गया है, जिनकी रिकॉर्डिंग कम से कम 24 महीने तक सुरक्षित रखनी होगी। मशीनों की संख्या और उत्पादन क्षमता की जानकारी एक्साइज विभाग को देनी होगी।
संशोधित नियमों के अनुसार चबाने वाले तंबाकू पर 82 प्रतिशत और गुटखा पर 91 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लागू की गई है। वहीं सेंट्रल एक्साइज एक्ट में बदलाव के बाद सिगरेट पर अब लंबाई के हिसाब से प्रति स्टिक टैक्स लगेगा।
छोटी और बिना फिल्टर वाली सिगरेट पर करीब 2.05 रुपये प्रति स्टिक, जबकि प्रीमियम और लंबी सिगरेट पर 5.40 रुपये तक अतिरिक्त ड्यूटी देनी होगी। खास और यूनिक डिजाइन वाली सिगरेट पर सबसे ज्यादा 8.50 रुपये प्रति स्टिक टैक्स तय किया गया है।
रेटिंग एजेंसी CRISIL का अनुमान है कि टैक्स बोझ बढ़ने से आने वाले वित्तीय वर्ष में सिगरेट की बिक्री 6 से 8 प्रतिशत तक घट सकती है।
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