UGC रेगुलेशन 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, बीजेपी के लिए बढ़ी राजनीतिक मुश्किल

Senior Reporter India | भारत के सुप्रीम कोर्ट ने UGC रेगुलेशन 2026 के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि प्रारंभिक तौर पर ये नियम न सिर्फ़ अस्पष्ट प्रतीत होते हैं, बल्कि इनके दुरुपयोग की भी आशंका है। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि वरिष्ठ और प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर इन नियमों की दोबारा समीक्षा कराई जानी चाहिए।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम रोक के बावजूद विवाद थमता हुआ नहीं दिख रहा है। कई सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों ने नए UGC नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग तेज़ कर दी है। उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के उद्देश्य से बनाए गए इन नियमों का सामान्य वर्ग द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध किया जा रहा है।
स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि विरोध प्रदर्शन सड़कों पर उतर आए हैं और सत्तारूढ़ भाजपा को अपने ही परंपरागत समर्थक वर्ग से तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कई भाजपा नेताओं और पदाधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई है, वहीं कुछ नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा भी दे दिया है। इससे पहले शंकराचार्य से जुड़े विवादों के कारण पार्टी पहले ही आलोचनाओं में घिरी हुई थी, और अब नए UGC रेगुलेशन भाजपा के लिए एक और बड़ी राजनीतिक चुनौती बनते नज़र आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी दिलचस्प तस्वीर देखने को मिल रही है। भाजपा के कट्टर आलोचक माने जाने वाले कुछ लोग पार्टी के समर्थन में बोलते दिख रहे हैं, जबकि कई पुराने समर्थक विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री के पुतले जलाते नज़र आ रहे हैं।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा कि ये नियम उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में समाजवादी पार्टी को राजनीतिक रूप से फायदा पहुंचा सकते हैं, जबकि भाजपा को नुकसान हो सकता है। उनके अनुसार, पार्टी नेतृत्व यह मानकर चल रहा है कि उच्च जाति वर्ग किसी भी परिस्थिति में भाजपा को छोड़ेगा नहीं, और यही सोच पार्टी की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं। कुछ का मानना है कि भाजपा को इससे बड़ा नुकसान हो सकता है, जबकि कुछ इसे सीमित असर वाला विवाद बता रहे हैं। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल भी फिलहाल बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट पक्ष नहीं लिया है। UGC रेगुलेशन पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने केवल इतना कहा कि “दोषी को सज़ा मिलनी चाहिए, लेकिन किसी निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।”
UGC रेगुलेशन 2026 को लेकर उठे इस व्यापक विरोध ने भाजपा के लिए एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। खास बात यह है कि विरोध पार्टी के भीतर से और उसी सामाजिक वर्ग से आ रहा है, जिसे अब तक भाजपा और नरेंद्र मोदी सरकार का मजबूत आधार माना जाता रहा है। कई ज़िला और राज्य स्तरीय नेताओं के इस्तीफों और सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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