व्यापार

अमेरिकी टैरिफ के झटके से उद्योगों को बचाने के लिए बजट में सरकार का बड़ा राहत पैकेज

Senior Reporter India | 🔹 अमेरिका के 50% टैरिफ से निपटने के लिए बजट में सरकार का बड़ा एक्शन प्लान

अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने बजट में उद्योग और निर्यात को राहत देने के लिए कई अहम फैसले किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद भारत अपने लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स को कमजोर नहीं होने देगा।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बनी असमंजस की स्थिति और ऊंचे टैरिफ के कारण खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकार ने उत्पादन बढ़ाने और निर्यात को सहारा देने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं।

🔹 कस्टम ड्यूटी में राहत और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

बजट में इनपुट पर कस्टम ड्यूटी घटाने, मैन्युफैक्चरिंग को क्लस्टर आधारित मॉडल में विकसित करने और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए कंटेनर निर्माण व मशीनरी के आधुनिकीकरण हेतु पूंजीगत सहायता देने की घोषणा की गई है। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उद्योग वैश्विक अस्थिरता के असर से सुरक्षित रहें और प्रतिस्पर्धा में बने रहें।

🔹 MSME को ताकत देने के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड

छोटे और मध्यम उद्योगों को मज़बूत करने के लिए बजट में ₹10,000 करोड़ के SME डेवलपमेंट फंड की घोषणा की गई है। इससे MSME सेक्टर को सस्ता वित्तीय सहयोग मिलेगा और भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी पकड़ और मज़बूत कर सकेंगी।

🔹 SEZ को मिली बड़ी राहत, रोज़गार पर नहीं पड़ेगा असर

स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) में काम कर रही यूनिट्स को राहत देते हुए सरकार ने वन-टाइम विशेष छूट देने का फैसला किया है। इसके तहत पात्र मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को सीमित मात्रा में रियायती ड्यूटी पर डोमेस्टिक टैरिफ एरिया (DTA) में सामान बेचने की अनुमति दी जाएगी। यह सीमा उनके कुल निर्यात के एक तय अनुपात तक ही होगी।

जून 2025 तक देश में 370 SEZ सक्रिय हैं। सितंबर-अक्टूबर में अमेरिकी टैरिफ के कारण निर्यात में आई गिरावट के बाद यह फैसला SEZ यूनिट्स और वहां कार्यरत लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।

🔹 टेक्सटाइल सेक्टर के लिए विशेष पैकेज

अमेरिकी टैरिफ से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले टेक्सटाइल उद्योग को लेकर सरकार ने विशेष रणनीति बनाई है। टेक्स-इको (TEX-ECO) पहल के जरिए टेक्सटाइल क्लस्टर्स के आधुनिकीकरण और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर ज़ोर दिया जाएगा।

इसके साथ ही रेशम, ऊन, जूट, मानव-निर्मित और आधुनिक फाइबर में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए नेशनल फाइबर मिशन की शुरुआत होगी। मशीनरी अपग्रेडेशन, नई टेक्नोलॉजी, साझा टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सेंटर्स के ज़रिये पारंपरिक टेक्सटाइल क्लस्टर्स को आधुनिक रूप दिया जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर रोज़गार के नए अवसर भी बनेंगे।

टेक्सटाइल और परिधान उद्योग देश के औद्योगिक उत्पादन में करीब 13 प्रतिशत, निर्यात में 12 प्रतिशत और GDP में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देता है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है, ऐसे में वहां लगाए गए ऊंचे टैरिफ इस सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिसे कम करने की कोशिश सरकार ने बजट के ज़रिये की है।

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