PACS से आयुर्वेद तक: बजट में कोऑपरेटिव, किसान और ‘मेड इन इंडिया’ दवाओं को नई उड़ान

Senior Reporter India | 🔹 PACS और कोऑपरेटिव सेक्टर को नई ताक़त, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
सरकार ने प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटीज़ (PACS) के ज़रिये डेयरी, तिलहन, फल और बागवानी से जुड़े सेक्टर में सहयोग और निवेश को मज़बूत करने की रणनीति अपनाई है। इस योजना के तहत प्राइमरी कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ और उनके सदस्यों द्वारा तैयार किए गए पशु आहार और कपास बीज की सप्लाई को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय में स्थिरता आएगी।
कोऑपरेटिव सेक्टर के लिए इस बार बजट में बड़ा इज़ाफा किया गया है। पिछले वर्ष के ₹981.31 करोड़ के मुकाबले इस बार ₹1,744.74 करोड़ का आवंटन किया गया है। यानी कोऑपरेटिव मंत्रालय के बजट में करीब 77.78 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है।
🔹 दूध, तिलहन और सब्ज़ी सप्लाई में PACS की भूमिका मज़बूत
दूध, तिलहन, फल और सब्ज़ियों की सप्लाई चेन से जुड़े PACS को और सशक्त बनाया जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार और आय के नए अवसर पैदा हों। इसके साथ ही इंटर-कोऑपरेटिव सोसाइटी डिविडेंड इनकम पर टैक्स में राहत का प्रस्ताव किया गया है, जिसका सीधा लाभ आगे चलकर इनके सदस्यों तक पहुंचेगा।
राष्ट्रीय कोऑपरेटिव फेडरेशनों को समर्थन देने के उद्देश्य से यह भी प्रस्ताव है कि नोटिफाइड राष्ट्रीय कोऑपरेटिव फेडरेशनों को कंपनियों में किए गए निवेश से मिलने वाली डिविडेंड इनकम पर तीन वर्षों तक टैक्स छूट दी जाएगी, बशर्ते यह निवेश 31 जनवरी तक किया गया हो।
🔹 आयुर्वेद और आयुष सेक्टर को वैश्विक पहचान
वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 के बाद आयुर्वेद और आयुष पद्धतियों को दुनिया भर में नई पहचान और स्वीकार्यता मिली है। इसे और मज़बूत करने के लिए आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाया जाएगा।
आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता जांच के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा, अगले पांच वर्षों में लगभग एक लाख प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
🔹 ‘मेड इन इंडिया’ दवाओं पर भरोसा बढ़ाने की तैयारी
भारतीय योग और आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित किया जाएगा। दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय औषधि नियंत्रक को और अधिक सशक्त बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय दवाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरें, ताकि ‘मेड इन इंडिया’ फार्मा उत्पाद दुनिया भर में भरोसे का प्रतीक बन सकें। सख्त नियमों और बेहतर निगरानी व्यवस्था से नकली और घटिया दवाओं पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी।
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