रणजी ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर का ऐतिहासिक कारनामा, पहली बार फाइनल में एंट्री

Senior Reporter India |67 साल पहले अपना पहला मुकाबला खेलने वाली जम्मू और कश्मीर क्रिकेट टीम ने घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में नया इतिहास रच दिया है। बुधवार को खेले गए सेमीफाइनल में टीम ने दो बार की चैंपियन बंगाल क्रिकेट टीम को छह विकेट से मात देकर पहली बार फाइनल का टिकट हासिल किया।
इस जीत की नींव मजबूत गेंदबाजी ने रखी। मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने वाले आकिब नबी को Player of the Match चुना गया। उन्होंने पूरे मैच में कुल नौ विकेट चटकाए और विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी।
बंगाल ने पहली पारी में 328 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। जवाब में जम्मू-कश्मीर की टीम 302 रन पर सिमट गई, जिससे मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया। दूसरी पारी में तेज गेंदबाज नबी (4/36) और सुनील (4/36) ने घातक गेंदबाजी करते हुए बंगाल को मात्र 99 रन पर ढेर कर दिया और मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।
126 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम ने संयम दिखाया। वंश शर्मा ने नाबाद 43 रन बनाए, जबकि अब्दुल समद ने 30 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। चार विकेट खोकर 126 रन बनाते ही जम्मू-कश्मीर ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली।
फाइनल मुकाबला 24 फरवरी को हुबली में खेला जाएगा, जहां टीम खिताब जीतने के इरादे से उतरेगी।
अगर टीम के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक उसने 334 रणजी मैच खेले हैं, जिनमें केवल 45 में जीत मिली है। पहली जीत के लिए भी उसे 44 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा था—1982-83 सत्र में सर्विसेज के खिलाफ जीत मिली थी। इससे पहले टीम दो बार क्वार्टर फाइनल की दहलीज पर रुक चुकी थी।
इस सीजन में कोच अजय शर्मा के मार्गदर्शन में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। राजस्थान, दिल्ली, हैदराबाद, मध्य प्रदेश और बंगाल जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल तक का सफर तय किया।
यह उपलब्धि न केवल टीम के लिए बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए गर्व का क्षण है। अब सबकी निगाहें फाइनल पर टिकी हैं, जहां इतिहास को और भी सुनहरा बनाने का मौका होगा।
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