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मिडिल ईस्ट तनाव का असर: तेल महंगा होने से भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है दबाव

एसबीआई रिपोर्ट में चेतावनी—कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, सप्लाई रूट और व्यापार पर पड़ सकता है असर

Report | New Delhi से सामने आई एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव अगर लंबे समय तक चलता है तो इसका असर भारत की आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। State Bank of India की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार इस स्थिति से देश की विकास दर धीमी पड़ने की आशंका जताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का भारत पर कई तरह से आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, ऊर्जा आपूर्ति के मार्ग में रुकावट, अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव और खाड़ी देशों से भारत आने वाले प्रवासी धन पर असर जैसी चुनौतियां शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा आती है, तो इससे विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz है। यह जलमार्ग दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में भी बताया गया है कि United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव से क्षेत्र में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ गया है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई है। बढ़ती ईंधन लागत और रुपये में कमजोरी के कारण आयातित Inflation भी बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में Brent Crude की कीमत करीब 9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जबकि शनिवार को कच्चे तेल के दाम 92 डॉलर प्रति बैरल तक चले गए।

आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में कच्चे तेल की कीमत करीब 58.92 डॉलर प्रति बैरल थी, जो फरवरी 2026 के अंत तक बढ़कर 70.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई। इसके बाद मार्च की शुरुआत में यह लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ 89 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चली गई।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है, तो भारत का चालू खाता घाटा यानी CAD लगभग 36 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकता है। इसके साथ ही लागत बढ़ने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आधारित महंगाई में भी करीब 35 से 40 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ोतरी होने की संभावना है।

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