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पश्चिम एशिया तनाव के बीच गैस आपूर्ति पर सरकार का बड़ा फैसला, घरेलू उपभोक्ताओं को दी पहली प्राथमिकता

होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से गैस सप्लाई प्रभावित होने के बाद केंद्र ने नई व्यवस्था लागू की, घरों और वाहनों के लिए गैस उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश।

Report | नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आने वाली गैस सप्लाई में रुकावट की आशंका के बीच केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस के वितरण को लेकर अहम कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और वाहनों के लिए गैस की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से पूरे देश में Essential Commodities Act के तहत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए नया आदेश जारी किया है।

सरकार ने इस नई व्यवस्था के तहत रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल कंपनियों को घरेलू गैस यानी एलपीजी के उत्पादन को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही होटल और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक संस्थानों में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की जरूरतों की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत की लगभग 30 प्रतिशत गैस आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। इसी को ध्यान में रखते हुए तेल और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देर रात अधिसूचना जारी कर गैस वितरण की प्राथमिकताओं में बदलाव किया।

नई व्यवस्था के अनुसार गैस उपभोक्ताओं को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सबसे ज्यादा प्राथमिकता घरेलू पाइप गैस (PNG), वाहनों के लिए सीएनजी और घरेलू एलपीजी सिलिंडर के उत्पादन को दी गई है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर पूरी यानी 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

दूसरे स्तर की प्राथमिकता उर्वरक उद्योग को दी गई है, जिन्हें उनकी औसत खपत का लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद चाय उद्योग, विनिर्माण क्षेत्र और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को तीसरी और चौथी श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें लगभग 80 प्रतिशत गैस आपूर्ति दी जाएगी।

भारत में प्रतिदिन लगभग 19.1 करोड़ मानक घन मीटर गैस की खपत होती है, जिसमें से करीब आधी मात्रा विदेशों से आयात की जाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गैस टैंकरों की आवाजाही बाधित होने के कारण लगभग 6 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है।

व्यावसायिक एलपीजी से जुड़ी समस्याओं को समझने के लिए सरकार ने तीन सदस्यीय समिति बनाई है। इस समिति में तेल कंपनियों आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों को शामिल किया गया है। यह टीम होटल और रेस्तरां संगठनों से बातचीत कर उनकी जरूरतों का आकलन करेगी और उसी आधार पर गैस आपूर्ति की प्राथमिकता तय करेगी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार नए कदमों के बाद तेल रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ गया है और अधिकांश रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आम लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इसके अलावा गैर-जरूरी और कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में गैस आपूर्ति घटाने के निर्देश दिए गए हैं। पेट्रोकेमिकल इकाइयों और बिजली उत्पादन संयंत्रों में गैस खपत को कम करने पर भी विचार किया जा रहा है।

रिफाइनरियों को अपनी गैस खपत में लगभग 35 प्रतिशत कटौती करने को कहा गया है, ताकि बची हुई गैस आम जनता तक पहुंचाई जा सके। साथ ही प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों का इस्तेमाल अब पेट्रोकेमिकल उत्पादों के बजाय घरेलू रसोई गैस के निर्माण में किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि भारत की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर है और ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए विभिन्न देशों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है।

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