मलेरिया के पैरासाइट में मिली बड़ी कमजोरी, नई खोज से इलाज में आ सकती है क्रांति
वैज्ञानिकों ने बताया कि एक खास protein को निशाना बनाकर भविष्य में नई treatment विकसित की जा सकती है

Report| दुनिया भर में मलेरिया आज भी एक गंभीर बीमारी बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में इस बीमारी से लगभग 6.10 लाख लोगों की मौत हुई, जिनमें सबसे ज्यादा मामले अफ्रीका महाद्वीप में सामने आए। खासतौर पर छोटे बच्चे इस बीमारी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
हाल ही में आई एक नई वैज्ञानिक स्टडी में मलेरिया फैलाने वाले पैरासाइट में एक महत्वपूर्ण कमजोरी का पता लगाया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में मलेरिया के प्रभावी इलाज के लिए नई दिशा दे सकती है।
इस रिसर्च में बताया गया कि मलेरिया के लिए जिम्मेदार सूक्ष्मजीवों की संरचना और उनकी वृद्धि प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इनकी कार्यप्रणाली को समझना इस बीमारी को नियंत्रित करने के नए रास्ते खोल सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार मलेरिया का इतिहास बहुत पुराना है और इसके शुरुआती रूप क्रेटेशियस काल तक पहुंचते हैं। हालांकि आज वैक्सीन उपलब्ध है, फिर भी यह बीमारी दुनिया के कई हिस्सों में लोगों को प्रभावित करती रहती है।
इसी कारण वैज्ञानिक लगातार ऐसे तत्वों की तलाश कर रहे हैं जो या तो पैरासाइट को कमजोर करें या मच्छरों के जरिए इसके फैलाव को रोक सकें। इस शोध में Rita Tewari और उनकी टीम ने मलेरिया के पैरासाइट की कोशिकीय प्रक्रिया का गहराई से अध्ययन किया। वह University of Nottingham से जुड़ी पैरासाइट सेल बायोलॉजिस्ट हैं।
मलेरिया एक प्रकार के सूक्ष्म जीवों से होता है जिन्हें प्रोटिस्ट कहा जाता है। ये एक कोशिका वाले यूकेरियोटिक जीव होते हैं और इन्हें न तो पूरी तरह जानवर माना जाता है, न ही पौधा या फंगस।
मलेरिया फैलाने वाले प्रोटिस्ट Plasmodium नामक समूह से जुड़े होते हैं। इस समूह में 150 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं, लेकिन इनमें से केवल पांच प्रजातियां ही इंसानों में मलेरिया का कारण बनती हैं।
ये पैरासाइट इंसान के शरीर और Anopheles mosquito नामक मच्छर दोनों में तेजी से बढ़ते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तेज़ वृद्धि प्रक्रिया को समझना मलेरिया को रोकने के प्रयासों में काफी मददगार हो सकता है।
नई स्टडी में शोधकर्ताओं ने ARK1 नाम के एक महत्वपूर्ण protein पर ध्यान केंद्रित किया। यह प्रोटीन मलेरिया पैरासाइट की कोशिका विभाजन प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने आधुनिक जेनेटिक तकनीकों का उपयोग करके इस प्रोटीन को निष्क्रिय कर दिया। परिणामों से पता चला कि ARK1 के बिना पैरासाइट सही ढंग से विभाजित नहीं हो पाए और उनकी वृद्धि रुक गई।
इतना ही नहीं, जिन पैरासाइट्स में यह प्रोटीन निष्क्रिय किया गया था, वे न तो इंसानी कोशिकाओं में विकसित हो पाए और न ही मच्छरों के शरीर में अपना जीवन चक्र पूरा कर सके। इसका मतलब है कि वे बीमारी फैलाने में असमर्थ हो गए।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ARK1 की यह अहम भूमिका इसे मलेरिया के खिलाफ नई treatment विकसित करने के लिए एक संभावित लक्ष्य बनाती है।
स्टडी के सह-लेखक Ryuji Yanase का कहना है कि “ऑरोरा” नाम रोमन पौराणिक कथा की देवी से लिया गया है और यह खोज मलेरिया के सेल बायोलॉजी को समझने में एक नई शुरुआत की तरह है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि क्योंकि यह प्रोटीन इंसानी कोशिकाओं से काफी अलग होता है, इसलिए भविष्य में ऐसी दवाएं तैयार की जा सकती हैं जो खास तौर पर मलेरिया पैरासाइट को निशाना बनाएं और मरीज के शरीर को कम से कम नुकसान पहुंचाएं।
यह शोध मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस बीमारी को रोकने के नए और प्रभावी तरीके सामने आ सकते हैं।
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