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2047 तक नई ताकत: भारत की सेना में Drone और Data आधारित युद्ध की तैयारी

भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने सेनाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए नई रणनीति तैयार की है, जिसमें अंतरिक्ष, साइबर और दिमागी युद्ध पर विशेष फोकस रहेगा।

Report| Indian Armed Forces को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से हाल ही में जारी विजन-2047 रणनीतिक दस्तावेज में कई नई इकाइयों के गठन की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत Data Force, ड्रोन फोर्स, कॉग्निटिव वॉरफेयर एक्शन फोर्स और एक विशेष रक्षा भू-स्थानिक एजेंसी स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

इसके अलावा अंतरिक्ष और साइबर खतरों से निपटने के लिए अलग-अलग स्पेस कमांड और साइबर कमांड बनाने की भी रूपरेखा तैयार की गई है। इस पहल का उद्देश्य यह है कि आने वाले समय में भारत की सेना पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर तकनीक आधारित आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।

Rajnath Singh ने यह दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि वर्ष 2047, यानी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारतीय सेनाओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार बनाना सरकार का लक्ष्य है।

नई प्रस्तावित रक्षा भू-स्थानिक एजेंसी आधुनिक युद्ध में सटीक मैपिंग और डेटा विश्लेषण का काम करेगी। सैटेलाइट इमेज और अन्य डिजिटल सूचनाओं के जरिए मिसाइल, ड्रोन और लड़ाकू विमानों को बिल्कुल सटीक लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इसके माध्यम से सीमा पार दुश्मन की गतिविधियों, बंकर निर्माण और सैन्य हलचल पर भी लगातार निगरानी रखी जा सकेगी।

नई Data Force का काम युद्ध के मैदान में लगे सेंसर, सैटेलाइट सिस्टम और ड्रोन से आने वाले विशाल डेटा को विश्लेषित करके रणनीतिक जानकारी में बदलना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से दुश्मन की संभावित चाल का अनुमान भी लगाया जाएगा।

वहीं ड्रोन फोर्स आधुनिक युद्ध की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ड्रोन आधारित हमले और निगरानी तकनीक से युद्ध अधिक तेज और सटीक हो सकेगा।

इसके साथ ही कॉग्निटिव वॉरफेयर एक्शन फोर्स पारंपरिक हथियारों के बजाय मनोवैज्ञानिक और सूचना आधारित युद्ध पर काम करेगी। इसमें दुश्मन की सोच, निर्णय लेने की क्षमता और जानकारी के प्रवाह को प्रभावित करने की रणनीतियां अपनाई जाएंगी। एआई और एल्गोरिदम जैसी आधुनिक तकनीकें इस क्षेत्र को और प्रभावी बनाएंगी।

प्रस्तावित स्पेस कमांड का उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद भारत की रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा करना होगा। यह संचार, नेविगेशन और निगरानी उपग्रहों को किसी भी संभावित हमले से सुरक्षित रखने के साथ-साथ युद्ध के समय अंतरिक्ष के सैन्य उपयोग को सुनिश्चित करेगा।

दूसरी ओर साइबर कमांड सेना के डिजिटल नेटवर्क को हैकिंग, मालवेयर और साइबर हमलों से बचाने का कार्य करेगा। आवश्यकता पड़ने पर यह दुश्मन देश के बिजली ग्रिड, संचार प्रणाली, रडार नेटवर्क और सैन्य नियंत्रण सॉफ्टवेयर को बाधित करने की क्षमता भी विकसित करेगा।

इस रणनीतिक दस्तावेज में विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र में भी बढ़त हासिल करने की दिशा में नई क्षमताएं विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे आधुनिक तकनीकी युद्ध में भारत की स्थिति और मजबूत हो सके।

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