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इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियों के बढ़ते इस्तेमाल पर सरकार चिंतित, पैकेट पर चेतावनी लिखने की तैयारी

स्वास्थ्य नियामकों की सिफारिश—Emergency Pill महीने में दो बार से ज्यादा न लेने की दी जाएगी स्पष्ट सलाह

Report| नई दिल्ली। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए स्वास्थ्य नियामक संस्थाओं ने चिंता जताई है। केंद्र सरकार के औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) ने सुझाव दिया है कि लेवोनोर्गेस्ट्रेल आधारित आपातकालीन गर्भनिरोधक दवाओं के पैकेट पर स्पष्ट चेतावनी लिखी जाए कि इन्हें महीने में दो बार से अधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

बोर्ड ने यह भी सिफारिश की है कि दवा के पैकेट और उसके साथ मिलने वाले सूचना पत्र में प्रमुखता से यह जानकारी दी जाए कि यह गोली एचआईवी या अन्य यौन संचारित संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान नहीं करती। साथ ही सुरक्षित यौन संबंध के लिए अन्य गर्भनिरोधक उपाय अपनाने की सलाह भी दी जाएगी।

अलीगढ़ के मोहन लाल गौतम महिला जिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल वाष्र्णेय के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में महानगरों के साथ छोटे शहरों में भी युवाओं के बीच Emergency Pill का उपयोग तेजी से बढ़ा है। कई लोग इसे नियमित गर्भनिरोधक के विकल्प की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं, जबकि यह केवल आपात स्थिति में गर्भधारण रोकने के लिए बनाई गई दवा है।

डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार इस तरह की गोली लेने से हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म में अनियमितता और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित गर्भनिरोध के लिए चिकित्सक की सलाह के अनुसार सुरक्षित विकल्प अपनाना जरूरी है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार भारत में आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली के बारे में जागरूकता वर्ष 2010 से 2021 के बीच बढ़कर लगभग 48 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि इन गोलियों का उपयोग करने वालों में बार-बार सेवन करना आम बात है, जिसकी दर अलग-अलग शोध में 12 प्रतिशत से 69 प्रतिशत तक बताई गई है।

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अनुसार 16 फरवरी को स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई थी। बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर जल्द ही राज्यों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली असुरक्षित यौन संबंध के बाद गर्भधारण को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसे 72 घंटे के भीतर लेने पर अधिक प्रभावी माना जाता है। इसमें मुख्य हार्मोन लेवोनोर्गेस्ट्रेल होता है।

बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि 0.75 मिलीग्राम और 1.5 मिलीग्राम लेवोनोर्गेस्ट्रेल टैबलेट को ड्रग्स रूल्स 1945 के शेड्यूल के में शामिल किया जाए। यदि ऐसा होता है तो इन दवाओं की बिक्री और उपयोग पर अधिक स्पष्ट नियम लागू हो जाएंगे। भारत में शेड्यूल के अंतर्गत आने वाली दवाएं सामान्यतः डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं बेची जा सकतीं।

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