प्रेरणा

तामसिक दान का आधार

 Motivation| प्रेरणा: इससे पूर्व की किस्त में श्रीमद्भगवद्‌गीता के सत्रहवें अध्याय के इक्कीसवें श्लोक पर – चर्चा की गई थी। इस श्लोक में श्रीभगवान कहते हैं कि जो दान क्लेशपूर्वक और प्रत्युपकार के – लिए अथवा फलप्राप्ति का उद्देश्य बनाकर किया जाता है, वह दान राजसिक दान कहलाता है। – वह दान जिसमें प्रत्युपकार की भावना निहित होती है अर्थात देते समय कहीं मन में यह भाव होता – है कि हम आज इस व्यक्ति की सहायता कर रहे हैं तो यह भी हमारी सहायता करे, सहयोग करे। क्लेशपूर्वक देते समय व्यक्ति के मन में आंतरिक आनंद का भाव नहीं होता, बल्कि वह व्यक्ति मन मसोसकर, येन-केन-प्रकारेण अपने दायित्व को पूर्ण करना चाहता है-ऐसे दान को राजसिक दान ही कहा जा सकता है। इस संदर्भ में कठोपनिषद् की नचिकेता-यम की कहानी सही ठहरती है। 

            जिस तरह के दान को देने का भाव नचिकेता के पिता के मन में आया, वो राजसी दान है। उसमें क्लेशयुक्त भाव सन्निहित है। सात्त्विक दान में देने वाले के हृदय में कर्त्तव्य और दायित्व का बोध होता है। कर्त्तव्य का अर्थ यह नहीं कि हम उसे बोझ समझकर जबरदस्ती कर रहे हैं, वरन कर्त्तव्य शब्द का अर्थ इस भाव से है कि उस कार्य को करना जिसके अतिरिक्त अन्य कुछ भी करने योग्य नहीं रह जाता। इसलिए सात्त्विक दान आंतरिक आनंद के फलस्वरूप प्रवाहित होता है। उसमें दान देने वाला, दान पाने वाले से ज्यादा तृप्त और तुष्ट अनुभव करता है। इसके विपरीत राजसी दाना देने वाला दान देकर भी असंतुष्ट और अतृप्त अनुभव करेगा; क्योंकि वह उसे प्रत्युत्तर की कामना से क्लेशपूर्वक कर रहा है। ऐसे दान का परिणाम भी क्लेशपूर्ण ही आता है।]

           जो दान बिना सत्कार के तथा अवज्ञापूर्वक अयोग्य देश और काल में कुपात्र को दिया जाता है, वह दान तामस कहा गया है। दान देते समय यदि भावना अपमान की है अर्थात ऐसा भाव है कि हम दान नहीं दे रहे, वरन इस व्यक्ति के ऊपर किसी तरह का एहसान कर रहे हैं तो वो असत्कार की भावना, अवज्ञा की भावना तामसिक दान का पहला आधार बनती है। भगवान कृष्ण ऐसी भावना को ‘असत्कृतम्’ एवं ‘अवज्ञातम्’ कहकर पुकारते हैं। कई लोग दान देते तो हैं, परंतु मन में कहीं यह भावना होती है कि जिसे दान दिया जा रहा है, वो हमसे हीन है, तुच्छ है और वो उनको दान इस तरह देने का प्रयत्न करते हैं मानो भिक्षा दी जा रही हो। इस भावना को भगवान कृष्ण तामसिक भावना कहते हैं। साथ ही दान देते समय कुछ लोग परिस्थितियाँ, समय, काल इत्यादि नहीं देखते- इस भावना को भी भगवान कृष्ण तामसिक दान मानते हैं। जैसे दान देने के लिए मन में श्रद्धा होनी आवश्यक होती है। तैत्तिरीय उपनिषद् कहता है – यह दान अपनी क्षमता के अनुसार, सुपात्र को देना चाहिए और दान यदि तीर्थस्थल, उचित समय व मुहूर्त में दिया जाए तो उसका परिणाम भी शुभ आता है। महाभारत में तो यहाँ तक कहा गया है कि 

    एकस्मिन्नप्यतिक्रान्ते दिने दानविवर्जिते । 

   वस्युभिर्मुषितस्येव युक्तमाक्रन्दितुं भृशम् ।। 

    अर्थात यदि एक दिन भी दान के बिना बीत जाए तो उस दिन इस तरह का शोक प्रकट करना चाहिए, जिस तरह लुटेरों से लुट जाने पर मनुष्य करता है। भगवान कृष्ण कहते हैं कि तामसिक व्यक्ति इन शास्त्रोक्त बातों को नहीं मानता और कुपात्र को देने में, कुसमय देने में, गलत उद्देश्य के लिए देने में संकोच नहीं करता। ऐसे दान को भगवान कृष्ण तामसिक दान कहकर पुकारते हैं। यहाँ पर स्मरणीय है कि शास्त्र ये भी कहते हैं कि दान देते समय अन्न, जल, वस्त्र और औषधि का यदि दान किया जा रहा हो तो ऐसे में पात्र- कुपात्र पर विचार नहीं किया जाता। इस तरह कुपात्र को देने वाला, असत्कार, अवज्ञा से देने वाला दान तामसिक दान कहलाता है। 

स्वामी रामकृष्ण परमहंस से उनके शिष्यों ने पूछा- “अवतार की पहचान कैसे होती है ?” स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने उत्तर दिया” मन से कामिनी और कांचन के गए बिना अवतार को पहचानना मुश्किल है। किसी बैंगन बेचने वाले से यदि तुम हीरे का मोल पूछोगे तो वो यही कहेगा कि मैं इसके बदले नौ सेर बैंगन दे सकता हूँ, इससे ज्यादा कुछ नहीं दे सकता। हीरे की कीमत जानने के लिए जौहरी के पास जाना जरूरी है। ऐसे ही अवतार को पहचानने के लिए मन में निरासक्ति का भाव आवश्यक है।” जो स्वयं तृष्णाओं, कामनाओं और महत्त्वाकांक्षाओं से घिरा हुआ है, वह दिव्यता की क्या पहचान कर पाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
स्वाद भी सेहत भी: बयु/बबुआ खाने के फायदे जानकर आप भी इसे डाइट में ज़रूर शामिल करेंगे गले की खराश से तुरंत राहत: अपनाएं ये असरदार घरेलू नुस्खे सर्दियों में कपड़े सुखाने की टेंशन खत्म: बिना बदबू और फफूंदी के अपनाएं ये स्मार्ट हैक्स सनाय की पत्तियों का चमत्कार: कब्ज से लेकर पेट और त्वचा रोगों तक रामबाण पानी के नीचे बसाया गया अनोखा शहर—मैक्सिको का अंडरवाटर म्यूजियम बना दुनिया की नई हैरानी सुबह खाली पेट मेथी की चाय—छोटी आदत, बड़े स्वास्थ्य फायदे