20,000 करोड़ के Gain Bitcoin घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई
डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक आयुष वाष्र्णेय गिरफ्तार, क्रिप्टो पोंजी स्कीम की जांच तेज।

Report| नई दिल्ली। देश के चर्चित 20,000 करोड़ रुपये के GainBitcoin मामले में Central Bureau of Investigation ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डार्विन लैब्स के सह-संस्थापक Ayush Varshney को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक वह इस घोटाले के प्रमुख आरोपियों में शामिल है।
जांच एजेंसी के अनुसार वाष्र्णेय के खिलाफ पहले से ही Look Out Circular जारी किया गया था। सोमवार को जब वह देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था, तब उसे Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport पर हिरासत में लिया गया। इसके बाद मंगलवार को उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
सीबीआई की जांच में सामने आया है कि Darwin Labs Pvt Ltd ने उस तकनीकी ढांचे को विकसित किया था, जिस पर कथित तौर पर यह पूरा क्रिप्टो घोटाला आधारित था। इस मामले में कंपनी के अन्य सह-संस्थापक Sahil Bagla और Nikunj Jain की भूमिका भी जांच के दायरे में है। निकुंज जैन वर्तमान में Woami AI में फाउंडर और चीफ कैपिटल ऑफिसर के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर एमसीएपी नामक क्रिप्टो टोकन और उससे जुड़े smart contract सिस्टम को डिजाइन किया था। इसी तकनीक का उपयोग कथित पोंजी स्कीम में किया गया।
बताया जाता है कि यह योजना वर्ष 2015 में Variabletech Pvt Ltd के नाम से शुरू की गई थी। जांच के अनुसार इस योजना के मुख्य मास्टरमाइंड Amit Bhardwaj (अब मृत) और उसके भाई Ajay Bhardwaj थे।
इस स्कीम में निवेशकों को 18 महीनों तक हर महीने करीब 10 प्रतिशत बिटकॉइन रिटर्न देने का लालच दिया जाता था। लोगों को बाहरी एक्सचेंज से बिटकॉइन खरीदकर गेन बिटकॉइन के तथाकथित क्लाउड माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट में जमा करने के लिए कहा जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार यह पूरा मॉडल मल्टी-लेवल मार्केटिंग पर आधारित पोंजी स्कीम था। शुरुआती समय में निवेशकों को बिटकॉइन में भुगतान मिलने के कारण यह योजना लाभदायक प्रतीत हुई। लेकिन 2017 के बाद कंपनी ने भुगतान अपने ही बनाए टोकन एमकैप में करना शुरू कर दिया, जिसकी कीमत बिटकॉइन के मुकाबले काफी कम थी। इससे हजारों निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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