सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: अब हर घर में अनिवार्य होगा कचरा Segregation

Senior Reporter India | आदमपुर कचरा खंती में लगातार लग रही आग की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी पाण्डेय ने इसे देश की कचरा प्रबंधन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत बताया है। उनके अनुसार, यह फैसला केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे भारत में कचरा निस्तारण की प्रणाली को नई दिशा देगा।
डॉ. पाण्डेय ने बताया कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि कचरा उत्पन्न करने वाला हर नागरिक उसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए बाध्य होगा। अब घरों में ही कचरे की Segregation अनिवार्य कर दी गई है। प्रत्येक परिवार को चार अलग-अलग डस्टबिन रखने होंगे—गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी वेस्ट और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के लिए।
यदि कोई परिवार कचरे को अलग-अलग करके नहीं देगा, तो नगर निगम के कर्मचारी मौके पर ही Fine लगा सकेंगे। अदालत ने यह भी साफ किया कि नियमों के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी। यानी जवाबदेही केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी तय होगी।
डॉ. पाण्डेय के मुताबिक, अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि बिना छंटाई का कचरा यदि डंपिंग साइट तक पहुंचता है तो संबंधित अधिकारी, पार्षद और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों पर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। बड़े मॉल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और अन्य संस्थानों को अपने स्तर पर कचरे का वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करना होगा।
इन संस्थानों को केंद्र सरकार के पोर्टल पर यह दर्ज करना अनिवार्य होगा कि उन्होंने अपने कचरे का उचित तरीके से प्रबंधन किया है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकारें सख्त नियम लागू कर सकती हैं और गंभीर लापरवाही की स्थिति में आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है।
यह आदेश संकेत देता है कि अब देश में कचरा प्रबंधन केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं रहेगा, बल्कि हर नागरिक और संस्था की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी बनेगा।
आदमपुर कचरा खंती में लगातार लग रही आग की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी पाण्डेय ने इसे देश की कचरा प्रबंधन व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत बताया है। उनके अनुसार, यह फैसला केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे भारत में कचरा निस्तारण की प्रणाली को नई दिशा देगा।
डॉ. पाण्डेय ने बताया कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि कचरा उत्पन्न करने वाला हर नागरिक उसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए बाध्य होगा। अब घरों में ही कचरे की Segregation अनिवार्य कर दी गई है। प्रत्येक परिवार को चार अलग-अलग डस्टबिन रखने होंगे—गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी वेस्ट और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के लिए।
यदि कोई परिवार कचरे को अलग-अलग करके नहीं देगा, तो नगर निगम के कर्मचारी मौके पर ही Fine लगा सकेंगे। अदालत ने यह भी साफ किया कि नियमों के पालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी। यानी जवाबदेही केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी तय होगी।
डॉ. पाण्डेय के मुताबिक, अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि बिना छंटाई का कचरा यदि डंपिंग साइट तक पहुंचता है तो संबंधित अधिकारी, पार्षद और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों पर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। बड़े मॉल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और अन्य संस्थानों को अपने स्तर पर कचरे का वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करना होगा।
इन संस्थानों को केंद्र सरकार के पोर्टल पर यह दर्ज करना अनिवार्य होगा कि उन्होंने अपने कचरे का उचित तरीके से प्रबंधन किया है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकारें सख्त नियम लागू कर सकती हैं और गंभीर लापरवाही की स्थिति में आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है।
यह आदेश संकेत देता है कि अब देश में कचरा प्रबंधन केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं रहेगा, बल्कि हर नागरिक और संस्था की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी बनेगा।
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