7 सितंबर की रात खिलेगा ब्लड मून, आसमान बनेगा लाल चांद का साक्षी

रविवार की रात आसमान एक अनोखी रंगशाला में तब्दील होने जा रहा है। 7 सितंबर की रात से 8 सितंबर की सुबह तक चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में डूब जाएगा और फिर उसकी चांदी जैसी चमकदार आभा गहरे लाल रंग में बदल जाएगी। यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। वह क्षण जब पूरा ब्रह्मांड एक खगोलीय नाटक रचेगा। यह ग्रहण भारत में रात 8:58 बजे शुरू होगा। रात 11 बजे से 12:22 बजे तक चंद्रमा चमकदार लाल रूप धारण करेगा और यह अद्भुत नजारा रात 2:25 बजे तक जारी रहेगा। करीब 5 घंटे 27 मिनट की इस खगोलीय घटना में ब्लड मून पूरे 82 मिनट तक अपनी रहस्यमयी आभा से सबको मंत्रमुग्ध रखेगा। खगोलविदों का कहना है, इस रात तारों से प्रेम करने वालों और आसमान को निहारने वालों के लिए पूजा-पाठ और भोजन से परहेज की परंपरा रही है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण का भोजन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन मान्यताओं की कड़ियां आज भी लोगों की आस्था से जुड़ी हुई हैं। वहीं, खगोल प्रेमियों के लिए यह रात जीवन भर के लिए यादगार बनने वाली है।
27 जुलाई 2018 के बाद ऐसा चांद पूरे देश में एक समान दिखाई देगा। परंपरा और आस्था: भारतीय संस्कृति में ग्रहण हमेशा से आस्था और विश्वास का विषय रहा है। प्राचीन मान्यताएँ भी इससे कम नहीं हैं, जहाँ आस्था और विज्ञान, दोनों ही अपनी-अपनी भाषा में इस घटना के महत्व को समझाते हैं। इस रात आसमान हमें याद दिलाएगा कि ब्रह्मांड सिर्फ़ ऊपर लटका हुआ नहीं है, यह हमारे भीतर जिज्ञासा और आश्चर्य की लौ भी जलाता है। खगोलविदों के अनुसार, चंद्र ग्रहण साल में दो बार तक हो सकते हैं, लेकिन यह पूर्ण चंद्र ग्रहण है। यानी चंद्रमा का पूरा चेहरा पृथ्वी की छाया में डूब जाएगा। भारत में ऐसा नजारा पिछली बार 2018 में दिखा था। अगली बार हमें 31 दिसंबर 2028 तक इंतज़ार करना होगा। नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि जब सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से गुज़रती हैं, तो नीली रोशनी बिखर जाती है और लाल तरंगें लंबी दूरी तय करके चंद्रमा तक पहुँचती हैं। यह लाल आभा चंद्रमा की सतह को रंग देती है और हमें आसमान में चमकदार लाल चंद्रमा दिखाई देता है।
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