पेट की चर्बी कम करने के लिए द्विपाद वृत्ताकार क्रिया सहायक

मृताकार क्रिया पेट, कमर और नितंब पर जमी ची की कम करने, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। इस क्रिया को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं। फिर दोनों कोहनियों के बल शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाकर रखें। छाती को तानकर या फुलाकर रखें। कंधा और कोहनी, दोनों १० डिग्री में और एक सीध में होने चाहिए तथा गर्दन में किसी प्रकार का कोई तनाव नहीं होना चाहिए। अब दोनों पैरों को धीरे-धीरे उठाते हुए दाहिनी तरफ से बड़ा गोला बनाते हुए दक्षिणाकृत (ब्लॉकवक्षन) घुमाएं। जब थक जाएं, तब शवासन में विश्राम करें और शरीर को डोला छोड़ दें।
अब धीरे से कोहनियों के बल आएं और दोनों पैरो को धीरे-धीरे उठाते हुए बाईं तरफ से बड़ागोला बनाते हुए यामावृत्त (एंटी-क्लॉकवाइज) घुमाएं। जितना दक्षिणावृप्त किया था, उतना ही वामावृत्त भी करें। जब थक जाएं और दोनों तरफ बराबर गोले बना लें, उसके बाद शवासन में लेट जाएं। शवासन में पेट और कमर की मांसपेशियों को डीला छोड़ दें। सामान्य तौर पर यह क्रिया कम से कम चार से छह चार दक्षिणावृत्त और चार से छह बार वामाबूत करनी चाहिए। जिन्हें वजन कम करना है, उन्हें 2 मिनट दक्षिणावृत्त और 2 मिनट वामानुत्त करना चाहिए। जिनकी गर्दन में दर्द, सूजन या अकड़न है, वे इस क्रिया की लेट कर भी कर सकते हैं। जिन महिलाओं को गर्भावस्था या माहवारी हो, उन्हें यह क्रिया नहीं करनी चाहिए। पेट में अल्सर या कमर में दर्द है तो यह किया एक पैर से ही करें।




