
किताबें नहीं मिली हैं, शिक्षक बीएलओ की ड्यूटी करने के लिए स्कूल से बाहर हैं। अगले महीने अर्धवार्षिक परीक्षाएं हैं, ऐसे में हम बच्चों से क्या उम्मीद कर सकते हैं? शैक्षणिक सत्र शुरू हुए पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन रायपुर समेत प्रदेश भर के कई स्कूलों में बच्चों को अभी भी पूरी किताबें नहीं मिली हैं। कुछ स्कूलों में पांचवीं के बच्चों को अंग्रेजी नहीं मिली है, तो कुछ में चौथी कक्षा के बच्चे हिंदी और गणित की किताबों का इंतजार कर रहे हैं। आधा सत्र बीत चुका है, लेकिन बच्चों के पास अभी भी अधूरी किताबें हैं। ऐसे में वे परीक्षा कैसे देंगे? यह सवाल हर कक्षा में गूंज रहा है। अगले महीने अर्धवार्षिक परीक्षाएं हैं और बच्चे और अभिभावक दोनों चिंतित हैं। अभनपुर विकासखंड के कुछ स्कूलों में कक्षा 8 की अंग्रेजी की किताबें नहीं मिली हैं। इसी तरह, धरसींवा विकासखंड के कुछ स्कूलों में कक्षा 1 की हिंदी और कक्षा 4 की हिंदी और गणित की किताबें नहीं हैं उदाहरण के लिए, रायपुर के रावणभाठा स्कूल के आठ शिक्षक और लाभांडी हायर सेकेंडरी स्कूल के सात शिक्षक इस काम में व्यस्त हैं। राज्य भर के ज़्यादातर सरकारी स्कूलों में यही हाल है। नतीजा अधूरी कक्षाएं, खराब पढ़ाई। न किताबें, न शिक्षक… और परीक्षाएँ सिर पर। अर्धवार्षिक परीक्षाएँ दिसंबर में और प्रायोगिक व प्री-बोर्ड परीक्षाएँ जनवरी में निर्धारित हैं। खबर है कि बीएलओ के बाद, सैकड़ों शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाया जाएगा। दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्र सबसे ज़्यादा परेशान हैं—अधूरी पढ़ाई, अधूरी तैयारी और अधूरी उम्मीदों के साथ।
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