केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 में 16वीं जनगणना कराने की अधिसूचना जारी की

16वीं जनगणना : केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 में 13वीं और 16वीं जनगणना कराने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही जातिगत जनगणना भी कराई जाएगी। जनगणना की पूरी प्रक्रिया पर 13,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा, पहाड़ी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जनगणना 1 अक्टूबर 2026 से कराई जाएगी, जबकि शेष राज्यों में यह 1 मार्च 2027 से कराई जाएगी। सरकार ने कहा है कि जनगणना के साथ ही जातिगत जनगणना भी कराई जाएगी। हालांकि अधिसूचना में जातिगत जनगणना का कोई जिक्र नहीं है। अधिसूचना के मुताबिक इस बार लोगों के लिए स्वगणना का प्रावधान भी उपलब्ध कराया जाएगा। आजादी के बाद 8वीं जनगणना देश में जनगणना प्रक्रिया शुरू होने के बाद से यह 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना है।
दो चरण में होगी प्रक्रिया : पहला चरण: हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) के तहत हर घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति और सुविधाओं के बारे में जानकारी एकत्र की जाएगी। दूसरा चरण: जनसंख्या जनगणना (PE) के तहत हर घर में जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक स्थिति और हर सदस्य का विवरण एकत्र किया जाएगा। देश भर से जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध कराने का यह बड़ा काम करीब 34 लाख गणनाकार और पर्यवेक्षक तथा करीब 1.3 लाख डिजिटल उपकरणों से लैस कार्मिकों द्वारा किया जाएगा। गणनाकार और पर्यवेक्षकों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण इस साल अक्टूबर में शुरू हो सकता है।
सामाजिक-आर्थिक जनगणना हुई, लेकिन आंकड़े जारी नहीं किए गए: 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना के नाम पर एक सर्वेक्षण किया गया था। जातिगत आंकड़े एकत्र किए गए, लेकिन कभी जारी नहीं किए गए। बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना ने पिछले तीन सालों में जातिगत सर्वेक्षण किए हैं। 2021 की जनगणना में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को भी अद्यतन करने की योजना थी, लेकिन 2027 की अधिसूचना में इसे स्पष्ट नहीं किया गया है।
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