चंद्रभेदी प्राणायाम: शरीर में चंद्रमा जैसी शीतलता लाने वाला अद्भुत योग अभ्यास

चंद्रभेदी प्राणायाम अत्यधिक गर्मी, पसीना, मुँह के छाले, पेट में जलन और पेट के अल्सर जैसी समस्याओं के लिए बेहद फायदेमंद है। यह प्राणायाम उच्च blood pressure के रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह शरीर के तंत्रिका तंत्र को ठंडक पहुँचाता है। ‘चंद्रभेदी’ का अर्थ है चंद्रमा के समान शीतलता प्रदान करने वाला। शरीर में दो नासिका छिद्र होते हैं। दाहिनी नासिका को सूर्य नाड़ी और बाईं नासिका को चंद्र नाड़ी कहते हैं। जब हम बाईं नासिका से साँस लेते हैं और दाईं नासिका से छोड़ते हैं, तो इसे चंद्रभेदी प्राणायाम कहते हैं। यह प्राणायाम विशेष रूप से गर्मी के मौसम में उपयोगी है। यह शरीर को गर्मी से संबंधित सभी रोगों से बचाता है।
इसे दिन में तीन बार किया जा सकता है – सुबह, दोपहर और शाम।
चंद्रभेदी प्राणायाम करने के लिए किसी भी आसन में बैठ जाएँ। सुनिश्चित करें कि आपकी कमर, गर्दन और सिर एक सीध में हों। चेहरे और पेट की मांसपेशियों पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए। अब Pranayama की मुद्रा में आ जाएँ। अपनी तर्जनी और मध्यमा उंगलियों को अपने अंगूठे के पास रखें। अपने दाहिने अंगूठे को अपनी दाहिनी नासिका पर और अपनी अनामिका व कनिष्ठिका को अपनी बाईं नासिका पर रखें। इस मुद्रा को नासिका मुद्रा भी कहते हैं। अब, अपनी दाहिनी नासिका को बंद रखते हुए, अपनी बाईं नासिका से साँस अंदर लें। फिर, अपनी दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे साँस बाहर छोड़ें। इस अभ्यास को दोहराएँ। अंत में, अपनी आँखें बंद करें और अपनी साँसों के प्रवाह को देखें और महसूस करें।
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