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छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने सरेंडर नक्सलियों के आपराधिक केस वापस लेने की प्रक्रिया को मंज़ूरी दी

छत्तीसगढ़/रायपुर । छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को सुलझाने/वापस लेने की प्रक्रिया को मंज़ूरी दे दी है। बुधवार को राजधानी में मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट की बैठक हुई। कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि कैबिनेट ने सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को सुलझाने/वापस लेने की प्रक्रिया को मंज़ूरी दे दी है। मंत्रिपरिषद ने एक उप-समिति के गठन को मंज़ूरी दी है। यह समिति सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खिलाफ दर्ज उन मामलों की समीक्षा और जांच करेगी जिन्हें कोर्ट से वापस लिया जाना है। जांच के बाद समिति मामलों को मंत्रिपरिषद के सामने पेश करेगी।

श्री साव ने कहा कि यह फैसला छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी छत्तीसगढ़ नक्सली आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत और पुनर्वास नीति-2025 के प्रावधानों के अनुसार है, जिसमें सरेंडर करने वाले नक्सलियों के अच्छे आचरण और नक्सलवाद के खात्मे में उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामलों को सुलझाने पर विचार करने का प्रावधान है। पुलिस के अनुसार, पिछले दो सालों में राज्य में 2380 से ज़्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना ​​है कि यह संख्या लगभग चार हज़ार है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खिलाफ मामले वापस लेने की प्रक्रिया के बारे में श्री साव ने कहा कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों के खिलाफ मामले वापस लेने की प्रक्रिया के लिए एक ज़िला-स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

यह समिति सरेंडर करने वाले नक्सली के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने के लिए पुलिस मुख्यालय को एक रिपोर्ट सौंपेगी। पुलिस मुख्यालय अपनी राय के साथ प्रस्ताव भेजेगा। विधि विभाग की राय लेने के बाद, मामलों को मंत्रिपरिषद की उप-समिति के सामने पेश किया जाएगा। उप-समिति द्वारा अनुशंसित मामलों को अंतिम मंज़ूरी के लिए मंत्रिपरिषद के सामने रखा जाएगा। केंद्रीय अधिनियमों या केंद्र सरकार से संबंधित मामलों के लिए, भारत सरकार से आवश्यक अनुमति प्राप्त की जाएगी। अन्य मामलों को कोर्ट में लोक अभियोजक के माध्यम से वापस लेने की प्रक्रिया के लिए ज़िला मजिस्ट्रेट को भेजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ पब्लिक ट्रस्ट (प्रावधानों में संशोधन) (दूसरा) विधेयक, 2025 में छोटे उल्लंघनों के लिए प्रशासनिक दंड के प्रावधान शामिल हैं, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा होगा, अदालतों पर बोझ कम होगा और नागरिकों को जल्द राहत मिलेगी। इसके अलावा, यह विधेयक कई अधिनियमों में पुराने दंड की रकम की समस्या को भी हल करेगा, जो प्रभावी प्रवर्तन में बाधा बन रही थी। ये संशोधन सुशासन को बढ़ावा देंगे। यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जिसने पब्लिक ट्रस्ट विधेयक का दूसरा संस्करण पेश किया है।

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