
New Delhi / Report.: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में कोयला लेवी घोटाले से कमाए गए लगभग ₹540 करोड़ का इस्तेमाल चुनाव खर्च, नेताओं और अधिकारियों को रिश्वत देने और प्रॉपर्टी खरीदने में किया गया था। यह घोटाला छत्तीसगढ़ में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था। ED ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ₹2.66 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच की है। ये प्रॉपर्टी निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया और आरोपी निखिल चंद्राकर की हैं। सौम्या मुख्यमंत्री कार्यालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात थीं।
एजेंसी ने कुल आठ अचल संपत्तियां अटैच की हैं, जिनमें ज़मीन के प्लॉट और रिहायशी फ्लैट शामिल हैं। आरोप है कि आरोपियों ने अपराध से मिले पैसे का इस्तेमाल करके ये प्रॉपर्टी अपने रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी थीं। ED का आरोप है कि जुलाई 2020 और जून 2022 के बीच, प्राइवेट लोगों, सीनियर नेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत से एक सिंडिकेट बनाया गया था, जिसने कोयला ट्रांसपोर्टरों से गैर-कानूनी तरीके से ₹25 प्रति टन वसूले, जिससे लगभग ₹540 करोड़ जमा हुए।
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