
छत्तीसगढ़/रायपुर । 20 नवंबर से छत्तीसगढ़ में लागू ज़मीन की गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी के खिलाफ़ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद, राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर यू-टर्न ले लिया है। गाइडलाइन दरों में संशोधन के संबंध में मिले सुझावों, ज्ञापनों और प्रस्तावों की गहन जांच के बाद, केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक में शहरी विकास, रियल एस्टेट सेक्टर और राज्य की आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। ये फैसले तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। सरकार ने शहरी क्षेत्रों में ज़मीन के मूल्यांकन के लिए इंक्रीमेंटल आधार पर गणना को खत्म करने और पिछली स्लैब-आधारित प्रणाली को फिर से लागू करने का फैसला किया है। वित्त और वाणिज्यिक कर मंत्री ओ.पी. चौधरी ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साई के निर्देशों के तहत, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और अधिक जन-अनुकूल बनाया जा रहा है। इस संबंध में, 20 नवंबर को लागू की गई गाइडलाइन दरों में कई महत्वपूर्ण जन-हितैषी सुधार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नई गाइडलाइन दरों के संबंध में मिले सुझावों, ज्ञापनों और आपत्तियों पर विचार करने के लिए रविवार को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक हुई थी।
बैठक में शहरी क्षेत्रों में ज़मीन के मूल्यांकन के लिए इंक्रीमेंटल आधार पर गणना को खत्म करने का फैसला किया गया। अब पहले से प्रचलित स्लैब-आधारित प्रणाली को फिर से लागू किया जाएगा, जिसके अनुसार नगर निगमों में 50 डेसिमल तक, नगर पालिकाओं में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायतों में 25 डेसिमल तक मूल्यांकन स्लैब दर पर किया जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में मूल्यांकन की जटिलता कम होगी और नागरिकों को सीधी राहत मिलेगी। मल्टी-स्टोरी इमारतों के संबंध में यह फैसला लिया गया: इसी तरह, मल्टी-स्टोरी इमारतों में फ्लैट, दुकानों या कार्यालयों के हस्तांतरण के दौरान, मूल्यांकन अब सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय बिल्ट-अप एरिया के आधार पर होगा।
यह प्रावधान लंबे समय से मांग में था, जिससे वर्टिकल विकास को गति मिलेगी और शहरी भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही, मल्टी-स्टोरी और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट और पहली मंजिल के मूल्यांकन पर 10 प्रतिशत और दूसरी मंजिल और उससे ऊपर 20 प्रतिशत की छूट देने का भी फैसला किया गया है। इससे मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर आवासीय और व्यावसायिक इकाइयां उपलब्ध होंगी। जिला समितियों से संशोधित प्रस्ताव मांगे गए: सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड ने नई गाइडलाइन दरों पर मिले सभी मेमोरेंडम और सुझावों की जांच की है और जिला वैल्यूएशन समितियों से 31 दिसंबर तक संशोधित प्रस्ताव जमा करने को कहा है। इन प्रस्तावों के आधार पर राज्य में भविष्य की गाइडलाइन दरों का ढांचा तैयार किया जाएगा।
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