
नई दिल्ली। Senior Reporter India | अदालत की बेंच ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि आरोपी विधायक को विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि कानूनी प्रक्रिया सर्वोपरि है और इस आधार पर पूर्व मंत्री को राहत नहीं दी जा सकती।
जमानत आदेश के तहत बेंच ने आरोपी को अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्हें यह भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे मामले से जुड़े किसी भी गवाह को प्रभावित करने या संपर्क करने की कोशिश न करें। ट्रायल की अवधि के दौरान लखमा को जांच एजेंसियों को अपना वर्तमान मोबाइल नंबर और पता उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जुड़े एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने लखमा को 2 अप्रैल 2025 को एक अन्य प्रकरण में हिरासत में लिया था।
जमानत पर फैसला सुनाते समय बेंच ने यह भी ध्यान में रखा कि दोनों मामलों की जांच अभी जारी है और आने वाले ट्रायल के दौरान सैकड़ों अभियोजन गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है। इसी को देखते हुए कोर्ट ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें लगाईं।
अदालत ने आदेश दिया कि पूर्व मंत्री को राज्य से बाहर रहना होगा और वे केवल सुनवाई की निर्धारित तारीखों पर ही अदालत में उपस्थित हो सकेंगे।
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