
Chhattisgarh । बीजेपी नेता और पोंडी उपरोरा जनपद पंचायत के पूर्व वाइस-चेयरमैन अक्षय गर्ग की बेरहमी से हत्या के मामले में पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई करते हुए सिर्फ़ 12 घंटे में पूरे मामले को सुलझा लिया है। पुलिस ने हत्या के मास्टरमाइंड मिर्ज़ा मुश्ताक अहमद और एक नाबालिग समेत चार अन्य आरोपियों को गिरफ़्तार किया है। जाँच में पता चला कि पंचायत चुनावों में करारी हार, घटता राजनीतिक समर्थन और कारोबारी दुश्मनी हत्या के मुख्य कारण थे। कटघोरा थाना क्षेत्र के कारखाना मोहल्ला के रहने वाले अक्षय गर्ग मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य के सिलसिले में कटोरी-नागोई में एक कैंप में पहुँचे थे। वह वहाँ मज़दूरों से बात कर रहे थे, तभी एक कार में आए हमलावरों ने अचानक उन पर चाकू और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। इस हमले में अक्षय गर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
एसपी के नेतृत्व में पुलिस, साइबर सेल और फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने मामले के विभिन्न पहलुओं की जाँच शुरू की। पुलिस को घटनास्थल के पास एक संदिग्ध कार से जुड़ी अहम जानकारी मिली, जो आगे की जाँच में निर्णायक साबित हुई। कार से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने कड़ियों को जोड़ा और संदिग्धों तक पहुँची। इसके बाद कटघोरा थाना क्षेत्र के मालदा गाँव के रहने वाले मिर्ज़ा मुश्ताक अहमद (27), विश्वजीत ओगरे (21, सिंधिया कोरबी), गुलशन दास (26, मालदा) और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया। यह अपराध एक सोची-समझी साज़िश के तहत किया गया था। दुश्मनी के चलते मिर्ज़ा मुश्ताक अहमद ने नाबालिग और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हत्या की साज़िश रची। योजना के मुताबिक, सभी आरोपी एक कार में अक्षय गर्ग का पीछा करते हुए कटोरी-नागोई पहुँचे और मौका मिलते ही उन पर जानलेवा हमला कर फ़रार हो गए। आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी और चाकू के साथ-साथ अन्य सामान, जिसमें लाइसेंस प्लेट नंबर CG 12 BF 4345 वाली कार भी शामिल है, ज़ब्त कर ली है।
पूछताछ के दौरान आरोपी टूट गए।
अपराध कबूल किया: पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने शुरू में टालमटोल वाले जवाब दिए, लेकिन कड़ी पूछताछ के आगे वे ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाए और उन्होंने पूरी साज़िश परत-दर-परत बता दी। जांच में पता चला कि मिर्ज़ा मुश्ताक अहमद ही इस हत्या का मास्टरमाइंड था। उसे तीन-स्तरीय पंचायत चुनावों में अक्षय गर्ग के हाथों करारी हार मिली थी। तब से वह राजनीतिक रूप से कमज़ोर होता जा रहा था। मृतक की मौजूदगी के कारण उसके कॉन्ट्रैक्ट के काम पर भी असर पड़ रहा था। इन्हीं कारणों से उसके मन में गहरी दुश्मनी पैदा हो गई थी।
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