लाइफ स्टाइल

अस्पताल की ‘गलती’ से जन्मा Cornflakes, बना Global ब्रांड

India।/ Report. आज नाश्ते की मेज पर दिखने वाला मशहूर ‘कॉर्नफ्लेक्स’ किसी फाइव स्टार होटल की देन नहीं है। इसकी शुरुआत अमेरिका के मिशिगन राज्य के एक अस्पताल से हुई थी—वह भी एक अनजाने प्रयोग के चलते।

इस कहानी के केंद्र में हैं दो भाई—John Harvey Kellogg और Will Keith Kellogg। 19वीं सदी के अंत में दोनों मिशिगन के Battle Creek स्थित एक चर्च संचालित अस्पताल से जुड़े थे। जॉन हार्वे कैलॉग पेशे से डॉक्टर थे और सख्त स्वास्थ्य नियमों के पक्षधर थे। वे शराब, तंबाकू, चाय, कॉफी और मसालेदार भोजन के खिलाफ थे। अस्पताल में मरीजों को बेहद सादा, शाकाहारी और हल्का भोजन दिया जाता था। अंडे और डेयरी उत्पादों का उपयोग भी सीमित था।

प्रयोग से बनी नई खोज

मरीजों को पौष्टिक लेकिन हल्का भोजन देने के प्रयास में 1894 में जॉन, उनकी पत्नी एला और उनके भाई विल ने अनाज पर प्रयोग शुरू किए। एक दिन उबले हुए गेहूं को प्रोसेस करते समय वह पतले-पतले फ्लेक्स में बदल गया। इस नई खोज को ‘ग्रेनोस’ नाम दिया गया। बाद में 1898 में टोस्टेड मक्का से कॉर्नफ्लेक्स तैयार किए गए और 1902 तक इसे बाजार में उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई।

‘चीनी’ को लेकर मतभेद

जैसे-जैसे यह उत्पाद लोकप्रिय हुआ, दोनों भाइयों के बीच विचारों का टकराव बढ़ने लगा। डॉ. जॉन इसे सिर्फ हेल्थ फूड के रूप में देखना चाहते थे और इसमें चीनी मिलाने के खिलाफ थे। उनका मानना था कि भोजन जितना सादा होगा, उतना ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा। दूसरी ओर, विल को इसमें बड़ा व्यावसायिक अवसर नजर आ रहा था। वे स्वाद बढ़ाने के लिए हल्की चीनी मिलाने के पक्ष में थे।

कंपनी की स्थापना और कानूनी लड़ाई

आखिरकार 19 फरवरी 1906 को विल ने अलग होकर ‘बैटल क्रीक टोस्टेड कॉर्न फ्लेक कंपनी’ की स्थापना की। बेहतर पैकेजिंग और आक्रामक मार्केटिंग के साथ उन्होंने उत्पाद को बाजार में उतारा। नतीजतन न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहर में इसकी बिक्री कई गुना बढ़ गई।

दोनों भाइयों के बीच ‘कैलॉग’ नाम के उपयोग को लेकर कानूनी विवाद भी हुआ, जिसमें 1911 में जीत विल की हुई। बाद में 1922 में कंपनी का नाम बदलकर Kellogg’s रख दिया गया, जो आज दुनिया की अग्रणी फूड कंपनियों में से एक है।

कर्मचारियों के लिए नई सोच

विल कीथ कैलॉग सिर्फ सफल कारोबारी ही नहीं थे, बल्कि वे कर्मचारियों के हितों को लेकर भी संवेदनशील थे। उन्होंने फैक्ट्री में 8 घंटे की जगह 6 घंटे की शिफ्ट लागू कर एक मिसाल पेश की।

इस तरह एक अस्पताल में शुरू हुआ प्रयोग आज विश्व स्तर पर पहचान बना चुका है और करोड़ों लोगों के Breakfast का हिस्सा बन गया है।

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