प्रेरणा

दीपक की कहानी

Motivation| प्रेरणा: दीपक जल रहा था, घृत चुकने को आया। लौ क्षीण हो चली। वायु के झोंकों ने देखा कि अब दीपक पर विजय पाना आसान है, तो वे वृंद-वृंद मिलकर तेज आक्रमण करने लगे। अंधकार नीचे दबा पड़ा था। यह स्थिति देखकर वह बोला – “दीपक, अब तो तुम्हारा अंत आ गया है। अब कुछ ही देर में यहाँ मेरा साम्राज्य स्थापित हो जाएगा।”

दीपक मुस्कराया और बोला- “यह देखना विधाता का काम है कि किसका साम्राज्य होगा। मेरा ध्येय है- प्रकाश बिखेरने के लिए निरंतर जलते रहना, सो अंत समय उससे विमुख क्यों होऊँ।” इसके थोड़ी देर पश्चात जब अंतिम क्षण आया तो दीपक ने अपनी समस्त शक्तियों को बटोरकर इतना प्रकाश कर दिया कि वहाँ का संपूर्ण अंधकार सिमटकर रह गया। परंतु दीपक का यह बलिदान व्यर्थ नहीं गया, क्योंकि अगले ही क्षण में सूर्योदय की लालिमा वातावरण में छाने लगी थी। प्रकाश के पथ पर अकेले आगे बढ़ने वाले चाहे कितने भी हारते क्यों न लगें, दैवी संरक्षण सदा उन्हें विजय का श्रेय दिलाता एवं अनगिनत विभूतियों का अधिकारी बनाता है।

नए खबरों के लिए बने रहे सटीकता न्यूज के साथ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
अडूसा: प्राकृतिक औषधि जो सर्दी, खांसी, घाव और दर्द में देती है राहत शादी में पुरुष क्या चाहते हैं? सुंदरता से ज़्यादा ये 5 गुण रिश्ते को बनाते हैं मज़बूत परीक्षा में सही टाइम मैनेजमेंट और स्मार्ट टाइम टेबल कैसे करे सर्दियों में इम्यूनिटी बढ़ाने का देसी तरीका, घर पर बनाएं सेहत से भरपूर कांजी स्वाद भी सेहत भी: बयु/बबुआ खाने के फायदे जानकर आप भी इसे डाइट में ज़रूर शामिल करेंगे गले की खराश से तुरंत राहत: अपनाएं ये असरदार घरेलू नुस्खे