विज्ञान

मानसिक तनाव से राहत का आसान तरीका: एक्सरसाइज़ से सुधर सकता है मूड और दिमाग

नई रिसर्च बताती है कि नियमित Exercise करने से Anxiety और Depression जैसे मानसिक समस्याओं में सुधार हो सकता है और दिमाग की सेहत भी बेहतर होती है।

Report| आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही हैं। एक अध्ययन के अनुसार हर पाँच में से लगभग एक व्यक्ति किसी न किसी समय चिंता, तनाव या अवसाद जैसी मानसिक चुनौतियों का सामना करता है।

हाल के वर्षों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता जरूर बढ़ी है, लेकिन इसके साथ जुड़ा सामाजिक कलंक अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यही कारण है कि कई लोग शारीरिक बीमारी की तुलना में मानसिक बीमारी के बारे में खुलकर बात करने से हिचकिचाते हैं।

मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए आज कई तरह के उपचार उपलब्ध हैं, लेकिन सही समय पर बीमारी की पहचान और उपचार तक पहुंचने में कई बार लंबा समय लग जाता है। इसके अलावा मूड से जुड़ी समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट भी होते हैं, जिसके कारण कई लोग दवा लेने से बचते हैं या बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं।

दूसरी ओर, पारंपरिक थेरेपी कई बार महंगी होती है और हर व्यक्ति के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में एक सरल और प्रभावी उपाय सामने आता है, जिसे आमतौर पर दिल और शरीर के स्वास्थ्य के लिए सुझाया जाता है — और वह है नियमित Exercise

कसरत से मूड क्यों बेहतर होता है?

बहुत से लोग यह अनुभव करते हैं कि वर्कआउट करने के बाद उन्हें मानसिक रूप से हल्का और खुश महसूस होता है। वैज्ञानिक शोध भी यह बताते हैं कि कसरत करने से कम समय और लंबे समय दोनों में चिंता और अवसाद के लक्षणों में सुधार हो सकता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि से शरीर में ऐसे हार्मोन और रसायन बनते हैं जो मूड को नियंत्रित करने में मदद करते हैं और तनाव झेलने की क्षमता बढ़ाते हैं।

आपने शायद “रनर हाई” के बारे में सुना होगा। यह वह खुशी और उत्साह की भावना है जो कई लोगों को दौड़ने या कसरत करने के बाद महसूस होती है। इसका कारण शरीर में एंडोर्फिन और एंडोकैनाबिनोइड जैसे रसायनों का बढ़ना होता है, जो दिमाग में सकारात्मक भावना पैदा करते हैं।

ट्रिप्टोफैन और दिमाग का संबंध

वैज्ञानिकों के अनुसार एक महत्वपूर्ण अमीनो एसिड, ट्रिप्टोफैन, भी मानसिक स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाता है। यह हमारे भोजन से शरीर में पहुंचता है और इससे सेरोटोनिन बनता है, जिसे अक्सर “फील गुड हार्मोन” कहा जाता है।

ट्रिप्टोफैन शरीर में अलग-अलग रास्तों से टूटकर कई प्रकार के मॉलिक्यूल बनाता है। इन रास्तों में से एक को Kynurenine Pathway कहा जाता है। इससे बनने वाले कुछ तत्व दिमाग के लिए लाभदायक होते हैं और सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जबकि कुछ अन्य तत्व शरीर में सूजन और विषाक्तता से जुड़े हो सकते हैं।

कई शोधों में पाया गया है कि डिप्रेशन, अल्ज़ाइमर और कुछ अन्य बीमारियों में इन नकारात्मक मेटाबोलाइट्स का स्तर अधिक हो सकता है। इसलिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि शरीर में अधिक लाभकारी मॉलिक्यूल कैसे बनाए जा सकते हैं।

एक्सरसाइज़ का वैज्ञानिक असर

शोध बताते हैं कि वर्कआउट करने से दिमाग की सुरक्षा करने वाले मॉलिक्यूल्स का स्तर बढ़ सकता है। यह प्रभाव साइक्लिंग, वेट ट्रेनिंग और हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट जैसी गतिविधियों के बाद देखा गया है।

यह दिलचस्प बात है कि इस तरह के सकारात्मक बदलाव केवल युवा लोगों में ही नहीं बल्कि बुजुर्गों में भी देखे गए हैं। इसका मतलब है कि नियमित शारीरिक गतिविधि हर उम्र के लोगों के लिए लाभकारी हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है एक्सरसाइज़

कसरत केवल शरीर को फिट रखने तक सीमित नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का भी एक प्रभावी तरीका है। इससे तनाव कम होता है, सकारात्मक हार्मोन बढ़ते हैं और व्यक्ति को सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का मौका मिलता है।

समूह में की जाने वाली गतिविधियां जैसे रनिंग क्लब, योग ग्रुप या अन्य खेल भी लोगों को सामाजिक जुड़ाव का अनुभव कराते हैं, जिससे मानसिक स्थिति बेहतर होती है।

इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप मानसिक तनाव से राहत चाहते हैं, तो रोजाना थोड़ी शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद फायदेमंद हो सकता है।

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