ईडी का बड़ा ऐक्शन प्लान: 31 मार्च तक 500 चार्जशीट का टारगेट

India।/ Report. नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब मनी लॉन्ड्रिंग मामलों को लंबित रखने के बजाय उन्हें तय समयसीमा में निपटाने की रणनीति पर काम कर रहा है। एजेंसी ने अपने अधिकारियों के लिए सख्त Action Plan तैयार किया है और चालू वित्तीय वर्ष के अंत यानी 31 मार्च तक कम से कम 500 मामलों में Charge Sheet दाखिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए समय सीमा भी तय की गई है। निर्देश दिया गया है कि किसी मामले के दर्ज होने के बाद उसकी जांच अधिकतम एक से दो वर्ष के भीतर पूरी कर ली जाए। केवल अत्यंत जटिल मामलों में ही अतिरिक्त समय की अनुमति होगी।
एजेंसी ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि यह फैसला पिछले वर्ष 19 से 21 दिसंबर के बीच गुवाहाटी में आयोजित 34वें त्रैमासिक क्षेत्रीय सम्मेलन में विस्तृत मंथन के बाद लिया गया। अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना, अभियोजन शिकायतें समय पर दाखिल करना और संपत्ति अटैचमेंट को कानूनी रूप से मजबूत बनाना प्राथमिकता होगी।
पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014 से 2024 के बीच धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कुल 5,297 मामले दर्ज किए गए, लेकिन करीब 1,500 मामलों में ही आरोपपत्र दाखिल हो सके। इनमें से केवल 58 मामलों की सुनवाई पूरी हुई, जिनमें 55 मामलों में दोष सिद्ध हुआ, जबकि 3 मामलों में आरोपी बरी हुए। इस प्रकार दोषसिद्धि दर लगभग 95 प्रतिशत रही। हालांकि 99 प्रतिशत से अधिक मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं।
राजनीतिक हस्तियों से जुड़े 190 से अधिक मामले भी दर्ज किए गए, लेकिन इनमें से सिर्फ दो मामलों में ही आरोप साबित हो सके। विशेष रूप से 2019 से 2024 के बीच नेताओं के खिलाफ मामलों में वृद्धि देखी गई।
नए जमाने के अपराधों पर नजर
ईडी अब पारंपरिक आर्थिक अपराधों के साथ-साथ अवैध सट्टेबाजी, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, शेयर बाजार में हेरफेर और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे मामलों पर भी कड़ी निगरानी रखे हुए है। विदेशी फंडिंग के जरिए राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की आशंका को लेकर भी अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सम्मेलन के दौरान ईडी निदेशक राहुल नवीन ने अधिकारियों को आगाह किया कि PMLA के तहत मिली शक्तियों का उपयोग जिम्मेदारी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ किया जाए। समन और नोटिस केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही जारी किए जाएं। जांच एजेंसियों को इंटरपोल और भारतपोल जैसे प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए।
विदेशों से सहयोग प्राप्त करने के लिए पारस्परिक कानूनी सहायता संधि (MLAT), लेटर्स रोगेटरी और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, निरस्त हो चुके फेरा कानून के तहत लंबित मामलों को भी 31 मार्च तक निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।
ईडी अब डिजिटल संपत्तियों, साइबर अपराध, विदेशों में अवैध संपत्ति और दिवालियापन कानून (IBC) के संभावित दुरुपयोग की भी गहन जांच करने की तैयारी में है। एजेंसी का फोकस लंबित मामलों को कम करने के साथ-साथ नए मामलों को तय समय में निष्पादित करने पर रहेगा।
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