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महंगाई काबू में, घाटा घटाने पर ज़ोर: निर्मला सीतारमण ने बजट विज़न किया साफ

Senior Reporter India | केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश में महंगाई की रफ्तार काबू में है और यह स्थिति लंबे समय से स्थिर बनी हुई है। बजट के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते आने वाले समय में भी महंगाई नियंत्रण में रहेगी।

उन्होंने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रहने की उम्मीद है, जो मौजूदा वित्त वर्ष के अनुमानित 4.4 प्रतिशत से कम है। उनके अनुसार, यह संकेत है कि सरकार वित्तीय अनुशासन को लेकर गंभीरता से आगे बढ़ रही है।

वित्त मंत्री ने बताया कि सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दो अहम फैसले लिए गए हैं, जिनसे इंडिया स्टैक और बौद्धिक संपदा से जुड़े ढांचे को मजबूती मिलेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ₹40,000 करोड़ की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना को एक बड़ा कदम बताया गया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की रणनीतिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए दुर्लभ पृथ्वी खनिज कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य देश के भीतर ही इन महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान, खोज और प्रोसेसिंग करना है, ताकि भविष्य में बाहरी स्रोतों पर निर्भरता घटाई जा सके। यह कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विकसित किए जाएंगे।

टैक्स व्यवस्था पर बात करते हुए सीतारमण ने दोहराया कि इस बजट में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, हालांकि नया आयकर कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।

उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। सरकार ने छोटे और मध्यम उद्योगों, कपड़ा और चमड़ा क्षेत्र, ग्रामीण श्रमिकों, किसानों, महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के प्रभाव से बचाने के लिए कई लक्षित योजनाएं शुरू की हैं।

सोशल मीडिया पर बजट को लेकर की जा रही राजनीतिक आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि किन सुधारों की बात की जा रही है। उन्होंने कहा कि आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन वे तथ्यों पर आधारित सवालों और तर्कों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनके अनुसार, बजट का मूल उद्देश्य आम नागरिकों को वैश्विक आर्थिक झटकों से सुरक्षित रखना है।

एक अहम घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में स्थित डेटा सेंटर्स के ज़रिये दुनिया भर के ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को वर्ष 2047 तक टैक्स छूट दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत को वैश्विक डेटा और क्लाउड सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, अनुमानित कर व्यवस्था के तहत टैक्स अदा करने वाली नॉन-रेजिडेंट कंपनियों को मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) से छूट देने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—
पहला, आर्थिक विकास को तेज़ और दीर्घकालिक बनाना;
दूसरा, नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करना;
और तीसरा, यह सुनिश्चित करना कि हर परिवार, क्षेत्र और उद्योग को समावेशी विकास के लिए ज़रूरी संसाधन और अवसर मिलें।

उन्होंने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल बजट व्यय ₹53.5 लाख करोड़ निर्धारित किया गया है।

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