बिना इंजन का भारतीय नौसेना जहाज कौंडिन्य पोरबंदर से मस्कट रवाना, इतिहास रचने की यात्रा शुरू

New Delhi/Porbandar। भारतीय नौसेना का बिना इंजन वाला पारंपरिक जहाज, INSV कौंडिन्य, सोमवार को पोरबंदर से ओमान के मस्कट के लिए अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रवाना हुआ। पश्चिमी नौसेना कमान के वाइस एडमिरल कृष्णा मीनाथन ने जहाज को हरी झंडी दिखाई। ओमान के भारत में राजदूत, ईसा सालेह अल शिबानी, भी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। यह जहाज लगभग 1500 साल पुरानी सिलाई वाली जहाज तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है, जिसमें लकड़ी के तख्तों को लोहे की कीलों से जोड़ने के बजाय नारियल के रेशों से सिला जाता है। बिना इंजन वाला कौंडिन्य पूरी तरह से हवा और पाल की मदद से समुद्र में यात्रा करेगा।
यह तकनीक भारतीय नाविकों की प्राचीन पारंपरिक तरीकों पर आधारित है। कौंडिन्य लगभग 19.6 मीटर लंबा और 6.5 मीटर चौड़ा है। इसमें 4 अधिकारियों और 13 नाविकों सहित 17 सदस्यों का दल है। कमांडर विकास शेरोन जहाज की कमान संभालेंगे, जबकि कमांडर वाई हेमंत कुमार मिशन लीडर होंगे। यह यात्रा भारत के पश्चिमी तट को ओमान से जोड़ने वाले प्राचीन समुद्री मार्ग का अनुसरण करेगी। नौसेना के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल नौकायन नहीं है, बल्कि भारत और ओमान के बीच साझा समुद्री विरासत, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना भी है। कौंडिन्य अरब सागर को पार करते हुए मस्कट पहुंचने के लिए लगभग 1,400 किलोमीटर की दूरी तय करेगा।
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